Wednesday, March 25, 2020

"हिन्दू नववर्ष" चैत्र शुक्ल प्रतिपदा विक्रमी संवत् 2077 (तदानुसार 25 मार्च 2020) की आप सभी को अग्रिम शुभकामनाएँ

*🚩नववर्ष की आप सभी को बहुत बहुत मंगलकामनाएँ जी 🚩*

*बंधुवर,*
          "हिन्दू नववर्ष" चैत्र शुक्ल प्रतिपदा विक्रमी संवत् 2077 (तदानुसार 25 मार्च 2020) की आप सभी को अग्रिम शुभकामनाएँ।*

*चैत्र शुक्ल प्रतिपदा का ऐतिहासिक महत्व :*

*1. इसी दिन आज से तथा सृष्टि संवत 1,96,08,53,121 वर्ष पूर्व सूर्योदय के साथ ईश्वर ने सृष्टि की रचना प्रारंभ की।*

*2. सम्राट विक्रमादित्य ने इसी दिन राज्य स्थापित किया। इन्हीं के नाम पर विक्रमी संवत् का पहला दिन प्रारंभ होता है।*

*3. प्रभु श्री राम के राज्याभिषेक का दिन यही है।*  

*4.  144  वर्ष पूर्व स्वामी दयानंद सरस्वती जी ने इसी दिन को आर्य समाज की स्थापना दिवस के रूप में चुना। आर्य समाज वेद प्रचार का महान कार्य करने वाला एकमात्र संगठन है।*

*5. विक्रमादित्य की भांति शालिवाहन ने हूणों को परास्त कर दक्षिण भारत में श्रेष्ठतम राज्य स्थापित करने हेतु यही दिन चुना।*

*6. युधिष्ठिर का राज्यभिषेक भी इसी दिन हुआ।*

*हिन्दू नववर्ष" का प्राकृतिक महत्व :-"*

*1. बसंत ऋतु का आरंभ वर्ष प्रतिपदा से ही होता है जो उल्लास, उमंग, खुशी तथा चारों तरफ पुष्पों की सुगंधि से भरी होती है।*

*2. फसल पकने का प्रारंभ यानि किसान की मेहनत का फल मिलने का भी यही समय होता है।*

*" हिन्दू नववर्ष" कैसे मनाएँ :-*

*1. हम परस्पर एक दूसरे को नववर्ष की शुभकामनाएँ दें।*

*2.‌ आपने परिचित मित्रों, रिश्तेदारों को नववर्ष के शुभ संदेश भेजें।*

*3 . इस मांगलिक अवसर पर अपने-अपने घरों पर भगवा पताका फैहराएँ। एवं‌ वेद आदि शास्त्रो के स्वाध्याय का संकल्प ले।*

*4. घरों में हवन यज्ञ (सामग्री मे लोबान एवं गंधक का उपयोग)आयोजन अवश्य करें ।*
*आप सभी से विनम्र निवेदन है कि "हिन्दू नववर्ष" हर्षोउल्लास के साथ मनाने के लिए ज्यादा से ज्यादा सज्जनों को प्रेरित करें।*

*और विशेष:- ज़्यादा घबराने की आवश्यकता नहीं है जी ...  आज की परिस्थिति देखकर एक वृतांत याद आया, महाभारत युद्ध में अपने पिता द्रोणाचार्य के धोखे से मारे जाने पर अश्वत्थामा बहुत क्रोधित हो गये*
*उन्होंने पांडव सेना पर एक बहुत ही भयानक अस्त्र "नारायण अस्त्र" छोड़ दिया।*
*इसका कोई भी प्रतिकार नहीं कर सकता था।यह जिन लोगों के हाथ में हथियार हो और लड़ने के लिए कोशिश करता दिखे उस पर अग्नि बरसाता था और तुरंत नष्ट कर देता था।*
*भगवान श्रीकृष्ण जी ने सेना को अपने अपने अस्त्र शस्त्र  छोड़ कर, चुपचाप हाथ जोड़कर खड़े रहने का आदेश दिया। और कहा मन में युद्ध करने का विचार भी न लाएं, यह उन्हें भी पहचान कर नष्ट कर देता है।*
*नारायण अस्त्र धीरे धीरे  अपना समय समाप्त होने पर शांत हो गया।*
*इस तरह पांडव सेना की रक्षा हो गयी।*

इस कथा प्रसंग का औचित्य समझें?

*हर जगह लड़ाई सफल नहीं होती।प्रकृति के प्रकोप से बचने के लिए हमें भी कुछ समय के लिए सारे काम छोड़ कर, चुपचाप हाथ जोड़कर, मन में सुविचार रख कर एक जगह ठहर जाना चाहिए। तभी हम इसके कहर से बचे रह पाएंगे।*

*कोरोना भी अपनी समयावधि पूरी करके शांत हो जाएगा।*
*हिंदु नववर्ष 2077 की आप सभी बंधुओं को पुन: अग्रिम शुभकामनाएँ 🙏🏼🙏🏼*

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