Monday, April 26, 2021

पंडित महावीर प्रसाद द्विवेदी युग की कविता 1900-1920 pandit mahaveer prasad duvedi yug ki kavita Poem of Pandit Mahavir Prasad Duvedi era



पं महावीर प्रसाद द्विवेदी युग की कविता 1900-1920

सन 1900 के बाद दो दशकों पर पं महावीर प्रसाद द्विवेदी का पूरा प्रभाव पड़ा। इस युग को इसीलिए द्विवेदी-युग कहते हैं। 'सरस्वती' पत्रिका के संपादक के रूप में आप उस समय पूरे हिंदी साहित्य पर छाए रहे। आपकी प्रेरणा से ब्रज-भाषा हिंदी कविता से हटती गई और खड़ी बोली ने उसका स्थान ले लिया। भाषा को स्थिर, परिष्कृत एवं व्याकरण-सम्मत बनाने में आपने बहुत परिश्रम किया। कविता की दृष्टि से वह इतिवृत्तात्मक युग था। आदर्शवाद का बोलबाला रहा। भारत का उज्ज्वल अतीत, देश-भक्ति, सामाजिक सुधार, स्वभाषा-प्रेम वगैरह कविता के मुख्य विषय थे। नीतिवादी विचारधारा के कारण श्रृंगार का वर्णन मर्यादित हो गया। कथा-काव्य का विकास इस युग की विशेषता है। भाषा खुरदरी और सरल रही। मधुरता एवं सरलता के गुण अभी खड़ी-बोली में आ नहीं पाए थे। सर्वश्री मैथिलीशरण गुप्त, अयोध्यासिंह उपाध्याय 'हरिऔध', श्रीधर पाठक, रामनरेश त्रिपाठी आदि इस युग के यशस्वी कवि हैं। जगन्नाथदास 'रत्नाकर' ने इसी युग में ब्रज भाषा में सरस रचनाएं प्रस्तुत कीं। इस युग के प्रमुख कवि

  • अयोध्या सिंह उपाध्याय 'हरिऔध'
  • रामचरित उपध्याय
  • जगन्नाथ दास रत्नाकर
  • गया प्रसाद शुक्ल 'सनेही'
  • श्रीधर पाठक
  • राम नरेश त्रिपाठी
  • मैथिलीशरण गुप्त
  • लोचन प्रसाद पाण्डेय
  • सियारामशरण गुप्त

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