Sunday, April 11, 2021

आत्मनिर्भर भारत अभियान Atmanirbhar bharta abhiyan

आत्मनिर्भर भारत 

आत्मनिर्भर भारत भारत के प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी की भारत को एक आत्मनिर्भर राष्ट्र बनाने सम्बन्धी एक दृष्टि (विजन) है। इसका पहली बार सार्वजनिक उल्लेख उन्होने 12 मई 2020 को किया था जब वे कोरोना-वाइरस विश्वमारी सम्बन्धी एक आर्थिक पैकेज की घोषणा कर रहे थे। आशा की ज रही है कि यह अभियान कोविड-19 महामारी संकट से लड़ने में निश्चित रूप से एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा और एक आधुनिक भारत की पहचान बनेगा। इसके तहत प्रधानमन्त्री पीएम मोदी ने 20 लाख करोड़ रुपए के राहत पैकेज की घोषणा की है जो देश की सकल घरेलू उत्पाद का लगभग 10 प्रतिशत है। इसकी खास बात यह है कि उन्होंने किसी को भी नगद बहुत कम दिया, लेकिन अर्थव्यवस्था के सम्यक संचालन का जो अभूतपूर्व दृष्टिकोण दिया, उससे न तो देश घाटे में रहेगा, न ही किसी को आगे वित्तीय मनमानी करने की छूट मिलेगी, जैसा कि अब तक बताया जाता रहा है।

आत्मनिर्भर भारत
प्रकारआर्थिक विकास
देशभारत
प्रधानमन्त्रीनरेन्द्र मोदी
मन्त्रालय
शुरूमई 12, 2020; 10 महीने पहले
वर्तमान स्थितिसक्रिय
भारत के रक्षामंत्री राजनाथ सिंह रक्षा-मंत्रालय और उद्योगों की एक वेबिनार को सम्बोधित करते हुए

आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों के कल्याण के लिए कुल 16-घोषणाएं की गईं ; गरीबों, श्रमिकों और किसानों के लिए अनेक घोषणाएं की गईं जिनमें किसानों की आय दोगुनी करने के लिए की गई 11 घोषणाएं भी शामिल हैं।

‘आत्मनिर्भर भारत’ के निर्माण में वैश्वीकरण का बहिष्कार नहीं किया जाएगा अपितु दुनिया के विकास में मदद की जाएगी। मिशन को दो चरणों में लागू किया जाएगा। प्रथम चरण में चिकित्सा, वस्त्र, इलेक्ट्रॉनिक्स, प्लास्टिक, खिलौने जैसे क्षेत्रों को प्रोत्साहित किया जाएगा ताकि स्थानीय विनिर्माण और निर्यात को बढ़ावा दिया जा सके। द्वितीय चरण में रत्न एवं आभूषण, फार्मा, स्टील जैसे क्षेत्रों को प्रोत्साहित किया जाएगा।

पैकेज का बहुत बड़ा हिस्सा ऋण के रूप में देने की योजना है। सरकार बैंकों को ऋण वापसी की गारंटी देगी। कुछ क्षेत्रों में ब्याज दर में 2 प्रतिशत का भार स्वयं वहन करेगी। ऋण की रकम सरकार नहीं बैंक से जाएगी। कोरोना महासंकट के दौर में दुनिया में भारत ही ऐसा राष्ट्र है जिसने इतने बड़े पैकेज की घोषणा की है। कोरोना महासंकट के बीच भी नरेन्द्र मोदी जिस आत्मविश्वास से इस महामारी से लडे़, उससे अधिक आश्चर्य की बात यह देखने को मिली कि उन्होंने देश का मनोबल गिरने नहीं दिया। उनसे यह संकेत बार-बार मिलता रहा है कि हम अन्य विकसित देशों की तुलना में कोरोना से अधिक प्रभावी एवं सक्षम तरीके से लड़े हैं और उसके प्रकोप को बांधे रखा है। इससे ऐसा बार-बार प्रतीत हुआ कि भारत दुनिया का नेतृत्व करने की पात्रता प्राप्त कर रहा है।

आत्मनिर्भर भारत अभियान के पाँच स्तम्भ 

  • (१) अर्थव्यवस्था – एक ऐसी अर्थव्यवस्था जो छोटे-छोटे परिवर्तन (इंक्रिमेंटल चेंज) नहीं, बल्कि ऊँची छलांग (क्वांटम जंप) लाए।
  • (२) बुनियादी ढांचा – एक ऐसा बुनियादी ढांचा, जो आधुनिक भारत की पहचान बने। विदेशी कंपनियों को आकर्षित कर सके।
  • (३) प्रौद्योगिकी – एक ऐसा सिस्टम, जिसमें आधुनिक तकनीक को अपनाने और समाज में डिजिटल तकनीक का उपयोग बढ़ाना शामिल है।
  • (४) जनसंख्यिकी (डेमोग्राफी)– भारत की जीवन्त जनसांख्यिकी हमारी ताकत है, आत्मनिर्भर भारत के लिए ऊर्जा का स्रोत है।
  • (५) मांग – भारत के पास बड़ा घरेलू बाजार और मांग है, उसे पूरी क्षमता से इस्तेमाल किए जाने की जरूरत है।

सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग 

मोदी सरकार ने सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों (एमएसएमई) को आर्थिक रूप से सक्ष्म बनाने के लिए इसकी परिभाषा में संशोधन किया है। सूक्ष्म या माइक्रो इकाई में निवेश की ऊपरी सीमा 1 करोड़ रुपये और टर्नओवर 5 करोड़ रुपये होना चाहिए। लघु इकाई में निवेश की ऊपरी सीमा 10 करोड़ रुपये और टर्नओवर 50 करोड़ रुपये होना चाहिए। मध्यम इकाई में निवेश की ऊपरी सीमा 50 करोड़ रुपये और 250 करोड़ का टर्नओवर होना चाहिए।

संकटग्रस्त एमएसएमई के लिए 20 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया, इससे 2 लाख एमएसएमई को मदद मिलेगी। फंड ऑफ फंड्स के माध्यम से एमएसएमई केलिए 50 हजार करोड़ रुपये की पूंजी लगाए जाने को स्वीकृति दी गई है। एमएसएमई के लिए 3 लाख करोड़ रुपये की आपातकालीन कार्यशील पूंजी सुविधा दी गई है।

सरकार और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों द्वारा 45 दिन के भीतर एमएसएमई के बकायों का भुगतान करना होगा। सूक्ष्‍म खाद्य उद्यमों (एमएफई) को औपचारिक रूप देने के लिए 10 हजार करोड़ रुपये की योजना शुरू की गई। 2 लाख एमएफई की सहायता के लिए ‘वैश्विक पहुंच के साथ वोकल फॉर लोकल’ का शुभारम्भ किया जाएगा। एमएसएमई की सहायता और कारोबार के नए अवसर के लिए ‘चैंपियंस’ पोर्टल लॉन्च किया गया है।

ज्ञातव्य है कि सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। 6 करोड़ से अधिक एमएसएमई जीडीपी में 29 प्रतिशत और निर्यात में लगभग 50 प्रतिशत योगदान करते हैं। इस क्षेत्र में 11 करोड़ से ज्यादा लोगों को रोजगार मिला हुआ है।

सरकार द्वारा इस क्षेत्र के लिए घोषित १६ नीतियाँ निम्नलिखित हैं-

  1. एमएसएमईज सहित व्यापार के लिए रुपये 3 लाख करोड़ संपार्श्विक निःशुल्क स्वचालित ऋण
  2. एमएसएमईज के लिए रु 20 हजार करोड़ का अधीनस्थ ऋण
  3. एमएसएमईज के फंड के माध्यम से रुपए 50 हजार करोड़ की इक्विटी इन्फ्यूशन
  4. एमएसएमईज की नई परिभाषा गढ़ी दी गई है।
  5. एमएसएमईज के लिए वैश्विक टेण्डर की सीमा बढ़ाकर 200 करोड़ रुपये तक कर दी गई है।
  6. एसएमई के लिए अन्य हस्तक्षेप भी किये गए हैं।
  7. 3 और महीनों के लिए व्यापार और श्रमिकों के लिए 2500 करोड़ रुपये का ईपीएफ समर्थन दिया गया है।
  8. ईपीएफ अंशदान 3 महीने के लिए व्यापार और श्रमिकों के लिए कम हो गया है।
  9. एनबीएफसीएस, एचसी, एमएफआई के लिए 30 हजार करोड़ रुपये की तरलता सुविधा प्रदान की गई है।
  10. एनबीएफसी के लिए 45000 करोड़ रुपये की आंशिक क्रेडिट गारंटी योजना दी गई है।
  11. डीआईएससीओएम के लिए 30 हजार करोड़ रुपये की तरलता इंजेक्शन दिया गया है।
  12. ठेकेदारों को राहत दी गई है।
  13. ईआरए के तहत रियल एस्टेट परियोजनाओं के पंजीकरण और पूर्णता तिथि का विस्तार किया गया है।
  14. डीएस-टीसीएस कटौती के माध्यम से 50 हजार करोड़ रुपये की तरलता प्रदान की गई है।
  15. अन्य कर उपाय किये गए हैं।

'मेक इन इंडिया' को प्रोत्साहन 

प्रधानमंत्री मोदी ने 4 जुलाई, 2020 को ऐप के मामले में आत्मनिर्भर बनने के लिए 'ऐप इनोवेशन चैलेंज' लॉन्च किया। एप इनोवेशन चैलेंज का मंत्र है ‘भारत में भारत और विश्व के लिए बनाओ' (मेक इन इंडिया फॉर इंडिया एंड द वर्ल्ड)।

भारत आज पीपीई किट का विश्व का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक बन गया है। सीएसआईआर-एनएएल ने 35 दिनों के भीतर बाईपैप वेंटिलेटर का विकास किया। वस्त्र समिति (मुंबई) ने पूर्ण रूप से स्वदेशी डिजाइन और ‘मेक इन इंडिया’ वाला पीपीई जांच उपकरण बनाया। बिजली क्षेत्र में ट्रांसमिशन लाइन टॉवर से लेकर, ट्रांसफार्मर और इन्सुलेटर तक देश में ही बनाने पर जोर दिया गया है। सभी सेवाओं में सरकारी खरीद व अन्य के लिए ‘मेक इन इंडिया’ नीति में संशोधन किया गया है। रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता के लिए ‘मेक इन इंडिया को बढ़ावा दिया जाएगा। एक निश्चित समयावधि के भीतर आयात पर प्रतिबंध लगाने के लिए हथियारों / प्लेटफार्मों की एक सूची को अधिसूचित किया जाएगा। आयातित पुर्जों का स्वदेशीकरण किया जाएगा और इसके लिए अलग से बजट का प्रावधान किया जाएगा। आयुध निर्माणियों (ऑर्डनेंस फैक्ट्रियों) को कॉर्पोरेट का दर्जा दिया जाएगा और उनको शेयर बाज़ार में सूचीबद्ध किया जाएगा।

कुछ परिणाम 

कोरोना काल के तीन-चार महीने में ही पीपीई की करोड़ों की इंडस्ट्री भारतीय उद्यमियों ने ही खड़ी की है। रक्षामंत्री ने घोषणा की है कि १०१ रक्षा उपकरणों के आयात पर रोक लगा दी गयी है।

प्रधानमन्त्री स्वनिधि योजना 

भारत में कोरोना महामारी से लॉकडाउन के कारण नाई की दुकानें, मोची, पान की दुकानें व कपड़े धोने की दूकानें, रेहड़ी-पटरी वालों की आजीविका पर सबसे ज्‍यादा असर पड़ा है। इस समस्या को ख़त्म करने के लिए प्रधानमंत्री के द्वारा आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत एक नई योजना की घोषणा की है जिसका नाम है पीएम स्वनिधि योजना। इस योजना के अंतर्गत रेहड़ी पटरी वालों को सरकार द्वारा 10,000 रूपये का ऋण मुहैया कराया जा रहा है। इस योजना के अंतर्गत दी जा रही अल्पकालिक सहायता 10,000 रुपया छोटे सड़क विक्रेताओं को अपना काम फिर से शुरू करने में सक्षम बनाएंगे। इस योजना के ज़रिये भी आत्मनिर्भर भारत अभियान को गति मिलेगी।

गरीबों, श्रमिकों और किसानों के लिए की गई मुख्य घोषणाएँ 

14 मई 2020 को घोषित आत्मनिर्भर भारत अभियान के अंतर्गत मुख्यतः गरीब, श्रमिक और किसानों के लिए जो घोषणाएं की गई हैं, वह निम्नलिखित हैं-

  • पहला, किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को प्रत्यक्ष सहायता प्रदान करने की पोस्ट कोविड-19 योजना
  • दूसरा, पिछले 2 महीनों के दौरान प्रवासी और शहरी गरीबों के लिए सहायता योजना
  • तीसरा, प्रवासियों को वापस करने के लिए एमजीएनआरईजीएस सहायता योजना
  • चतुर्थ, श्रम संहिता में बदलाव करके श्रमिकों के लिए लाभ सुनिश्चित करना
  • पंचम, 2 महीने के लिए प्रवासियों को मुफ्त भोजन की आपूर्ति
  • षष्ठम, 2021 तक 'एक देश एक राशन कार्ड' द्वारा भारत में किसी भी उचित मूल्य की दुकान से सार्वजनिक वितरण प्रणाली का उपयोग करने के लिए प्रवासियों को सक्षम करने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली प्रौद्योगिकी प्रणाली को बढ़ावा दिया जाना तय हुआ है।
  • सप्तम, प्रवासी श्रमिकों, शहरी गरीबों के लिए किफायती किराये के आवास परिसर बनाने की पहल
  • अष्टम, मुद्रा शिशु ऋण के लिए 1500 करोड़ रुपये दिए गए हैं।
  • नवम, स्ट्रीट वेंडर्स के लिए 5 हजार करोड़ रुपये की विशेष क्रेडिट सुविधा दी जा रही है।
  • दशम, सीएलएसएस के विस्तार के माध्यम से आवास क्षेत्र और मध्यम आय वर्ग को बढ़ावा देने के लिए 70 हजार करोड़ रु निर्धारित
  • ग्यारह, सीएएमपीए फंड का उपयोग कर 6 हजार करोड़ रोजगार पक्का किया जा रहा है।
  • बारह, नाबार्ड के माध्यम से किसानों के लिए 30 हजार करोड़ रुपये की अतिरिक्त आपातकालीन कार्यशील पूंजीगत निधि सुनिश्चित की गई है।
  • तेरह, किसान क्रेडिट कार्ड के माध्यम से ढाई करोड़ किसानों को बढ़ावा देने के लिए 2 लाख रु रखे गए हैं।

किसानों की आय दोगुनी करने के लिए की गई ११ घोषणाएं 

आत्मनिर्भर भारत अभियान के अंतर्गत केंद्र सरकार द्वारा देश के किसानों की आय को दोगुना करने के लिए मुख्यतः ग्यारह प्रकार की घोषणा की गई है।

  1. कृषि अवसंरचना की स्थापना के लिए 11 लाख करोड़ रुपये का कोष
  2. सूक्ष्म खाद्य उद्यमों के एक औपचारिककरण के उद्देश्य से एक नई योजना के लायक रु 10 हजार करोड़ दिए जा रहे हैं।
  3. प्रधानमंत्री मातृ संपदा योजना के तहत मछुआरों के लिए 2 हजार करोड़ रुपये आवंटित
  4. पशुपालन के बुनियादी ढांचे के विकास के लिए 15 हजार करोड़ रुपये का सेटअप किया जाएगा।
  5. केन्द्र सरकार जड़ी-बूटियों की खेती के लिए 4 हजार करोड़ रुपये आवंटित करेगी।
  6. मधुमक्खी पालन की पहल के लिए 500 करोड़ रुपये अलग रखे गए हैं।
  7. 500 करोड़ रुपये के सभी फलों और सब्जियों को कवर करने के लिए 'ऑपरेशन ग्रीन' का विस्तार किया जाएगा।
  8. अनाज, खाद्य तेल, तिलहन, दालें, प्याज और आलू जैसे आवश्यक भोजन में संशोधन लाया जाएगा।
  9. कृषि विपणन सुधारों को एक नए कानून के माध्यम से लागू किया जाएगा जो अंतरराज्यीय व्यापार के लिए बाधाओं को दूर करेगा।
  10. किसान को सुविधात्मक कृषि उपज के माध्यम से मूल्य और गुणवत्ता आश्वासन दिया जाएगा।
  11. चौथा और पाँचवाँ ट्रान्च ज्यादातर संरचनात्मक सुधारों से जुड़ा था, जो कुल मिलाकर 48,100 करोड़ का था, जिसमें वायबिलिटी गैप फंडिंग ₹ 8,100 करोड़ है। इसके अतिरिक्त मनरेगा के लिए 40,000 करोड़ रखे गए हैं।

आत्मनिर्भर भारत अभियान के लाभ देश के गरीब नागरिक, श्रमिक, प्रवासी मजदूर, पशुपालक, मछुआरे, किसान, संगठित क्षेत्र व असंगठित क्षेत्र के व्यक्ति, काश्तकार, कुटीर उद्योग, लघु उद्योग, मध्यमवर्गीय उद्योग को मिलेंगे। जिससे 10 करोड़ मजदूरों को लाभ होगा, एमएसएमई से जुड़े 11 करोड़ कर्मचारियों को फायदा होगा, उद्योग से जुड़े 3.8 करोड़ लोगों को लाभ पहुँचेगा और वस्त्र उद्योग से जुड़े साढ़े चार करोड़ कर्मचारियों को लाभ पहुंचेगा।

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