Tuesday, April 27, 2021

सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य की जीवनी एवं इतिहास Biography and History of Emperor Chandragupta Maurya

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    "चन्द्रगुप्त मौर्य की जीवनी एवं इतिहास !!

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☞"चन्द्रगुप्त मौर्य साम्राज्य के संस्थापक और अखंड भारत निर्माण करने वाले प्रथम सम्राट थे. उन्होंने 324 ई. पूर्व तक राज किया और बाद में बिन्दुसार ने मौर्य साम्राज्य की कमान संभाली थी. चन्द्रगुप्त मौर्य भारत के इतिहास में एक निर्णायक सम्राट था. उसने नन्द वंश के बढ़ते अत्याचारों को देखते हुए चाणक्य के साथ मिलकर नन्द वंश का नाश किया. उसने यूनानी साम्राज्य के सिकन्दर महान के पूर्वी क्षत्रपों को हराया और बाद में सिकन्दर के उत्तराधिकारी सेल्यूकस को हराया. यूनानी राजनयिक मेगास्थिनिज ने मौर्य इतिहास की काफी जानकारी दी. आइये अब आपको चन्द्रगुप्त मौर्य के जीवन के बारे में विस्तार से बताते है

📵"चन्द्रगुप्त मौर्य का प्रारम्भिक जीवन-

☞"326 इसा पूर्व में जब सिकन्दर ने भारत पर आक्रमण किया था तब चन्द्रगुप्त किशोरावस्था में थे. सिकंदर ने Khyber Pass को पार कर राजा पुरु को हरा दिया था जबकि उसकी सेना बहुत बड़ी थी. उस समय राजा पुरु की सेना में 30 हाथी थे जिन्होंने सिकन्दर के घोड़ो और घुड़सवारो को रौंद दिया था. अब विजेता सिकन्दर का अगला निशाना नन्द साम्राज्य था जिसके पास 6000 हाथी और विशाल सेना थी. सिकन्दर जान गया था कि वो इस सेना को नही जीत पायेंगे इसलिए सिकन्दर की सेना गंगा के मैदानों से ही वापस लौट गयी. विश्व विजेता सिकन्दर ने नन्द साम्राज्य के आगे घुटने टेक दिए. इस घटना के पांच साल बाद सिकन्दर के भारत की जीत के स्वप्न को चन्द्रगुप्त मौर्य ने पूरा किया 

☞"चन्द्रगुप्त मौर्य का जन्म 340 इसा पूर्व बिहार राज्य के पटना जिले में माना जाता है. उसके जन्म के वास्तविक समय के बारे में अभी भी विवाद है. उदाहरण स्वरुप कुछ ग्रन्थ बताते है कि चन्द्रगुप्त के पिता एक क्षत्रिय थे और एक दुसरे ग्रन्थ में ये बताया गया है कि चन्द्रगुप्त के पिता तो राजा थे लेकिन माँ शुद्र जाति की एक दासी थी. चन्द्रगुप्त के बचपन के बारे में इतिहास में अधिक जानकारी नही है केवल नन्द साम्रज्य से जुडी उनकी कुछ कहानिया इतिहास में है कि किस प्रकार उन्होंने नन्द साम्राज्य का पतन कर मौर्य साम्राज्य की स्थापना की थी.

📵' नंद साम्राज्य का विनाश और मौर्य साम्राज्य की स्थापना 

☞"नन्द साम्राज्य के पतन से पूर्व नन्द साम्राज्य का आपको इतिहास बताना चाहते है क्योंकि ये वही वंश था जिसने विश्व विजेता सिंकन्दर को भारत में आने से रोका था. नन्द साम्राज्य में मगध पर राज करने वाले नौ भाई थे लेकिन उन सबमे महापदम् नंदा सबसे प्रसिद्ध था जिसे उग्रसेन नंदा भी कहते थे. उसका छोटा भाई धन नंदा था जो इस वंश का अंतिम शाषक था. धन नंदा के पास एक विशाल सेना थी जिसमे 200,000 पैदल सेना , 20,000 घुड़सवार सेना , 2,000 रथ  and 3,000 युद्ध हाथी थे. धन नंदा के शाषन के समय 326 ई. पूर्व में सिकन्दर ने भारत पर आक्रमण कर दिया और नंदा की मजबूत सेना ने उसे परास्त कर उसके अभियान को गंगा के मैदानों और सिंध तक सिमित कर दिया.

☞"धन नंदा एक निरंकुश शासक था जिसने प्रतिदिन की वस्तुओ पर भी कर लगा दिया था जिसकी वजह से उसके खिलाफ असंतोष पनपने लगा. उस समय भारत विघटित होना शुर हो गया था और नंदा इस मामले में बहुत लापरवाह था इसलिए जनता के आक्रोश छा गया था. उस समय चाणक्य तक्षशिला का प्रख्यात शिक्षक था  और भारत पर विदेशी आक्रमणों के सिलसिले में बात करने मगध के दरबार में गया. नंदा ने ना केवल उसके प्रस्ताव को अस्वीकृत किया बल्कि उसका अपमान भी किया.

☞"चाणक्य ने अपनी शिखा खोलकर उसी समय बदला लेने की शपथ खाई उसने चन्द्रगुप्त मौर्य को नंदा के विरुद्ध युद्ध करने के लिए तैयार किया चन्द्रगुप्त को नन्द साम्राज्य से उस समय देश निकाला मिला था तो चाणक्य ने चन्द्रगुप्त को नन्द साम्राज्य के स्थान पर उसे सिंहासन पर बिठाने का आश्वासन देकर अपने साथ किया 

☞"चाणक्य को नन्द वंश के राजा ने जो अपमानित किया था उसका प्रतिशोध वो नन्द वंश को समाप्त कर लेना चाहता था तो चाणक्य ने चन्द्रगुप्त को हिन्दू सूत्रों के अनुसार कई तकनीके सिखाई और सेना बढाई

सम्राट् चंद्रगुप्त मौर्य के राज्यारोहण की तिथि साधारणतया 322 ई.पू.निर्धारित की जाती है। उन्होंने लगभग 24 वर्ष तक शासन किया और इस प्रकार उनके शासन का अंत प्राय: 298 ई.पू. में हुआ।

☞"विष्णु पुराण, माहाभारत के और भारतीय इतिहासकारो जैसे कि द्विजेन्द्रलाल राय ,मुद्राराक्षस के अनुसार चन्द्रगुप्त, सूूर्यगुप्त(सर्वार्थसिद्धी)ओर मुर (शिवा) के पुत्र है.

☞"मेगस्थनीज ने चार साल तक चन्द्रगुप्त की सभा में एक यूनानी राजदूत के रूप में सेवाएँ दी। ग्रीक और लैटिन लेखों में , चंद्रगुप्त को क्रमशः सैंड्रोकोट्स और एंडोकॉटस के नाम से जाना जाता है।

☞"चंद्रगुप्त मौर्य प्राचीन भारत के इतिहास में एक महत्वपूर्ण राजा हैं। चन्द्रगुप्त के सिहासन संभालने से पहले, सिकंदर ने उत्तर पश्चिमी भारतीय उपमहाद्वीप पर आक्रमण किया था, और 324 ईसा पूर्व में उसकी सेना में विद्रोह की वजह से आगे का प्रचार छोड़ दिया, जिससे भारत-ग्रीक और स्थानीय शासकों द्वारा शासित भारतीय उपमहाद्वीप वाले क्षेत्रों की विरासत सीधे तौर पर चन्द्रगुप्त ने संभाली। चंद्रगुप्त ने अपने गुरु चाणक्य (जिसे कौटिल्य और विष्णु गुप्त के नाम से भी जाना जाता है, जौ चन्द्र गुप्त के प्रधानमंत्री भी थे) के साथ, एक नया साम्राज्य बनाया, राज्यचक्र के सिद्धांतों को लागू किया, एक बड़ी सेना का निर्माण किया और अपने साम्राज्य की सीमाओं का विस्तार करना जारी रखा।

☞"चंद्रगुप्त मौर्य प्राचीन भारत के नेपाल के तराई वाले क्षेत्र छोटे से गणराज्य के राजा के पुत्र थे उनके पिता की हत्या कर राज्य हथियाने के कारण उनकी माता उन्हें लेकर पाटली पुत्र चली आई थी यही पर उनकी मुलाकात चाणक्य से हुईं थीं। मध्यकालीन अभिलेखों के साक्ष्यानुसार मौर्य सूर्यवंशी मांधाता से उत्पन्न थे। बौद्ध साहित्य में मौर्य क्षत्रिय कहे गए हैं। महावंश चंद्रगुप्त कोमोरिय (मौर्य) खत्तियों से पैदा हुआ बताता है। दिव्यावदान में बिंदुसार स्वयं की मूर्धाभिषिक्त क्षत्रिय कहते हैं। सम्राट अशोक भी स्वयं को क्षत्रिय बताते हैं। महापरिनिब्बान सुत्त से 5 वी शताब्दी ई 0 पू 0 उत्तर भारत आठ छोटे छोटे गाणराज्यों में बटा था। 

☞"मोरिय पिप्पलिवन के शासक, गणतांत्रिक व्यवस्थावाली जाति सिद्ध होते हैं। पिप्पलिवन ई.पू. छठी शताब्दी में नेपाल की तराई में स्थित रुम्मिनदेई से लेकर आधुनिक देवरिया जिले के कसया प्रदेश तक को कहते थे। मगध साम्राज्य की प्रसारनीति के कारण इनकी स्वतंत्र स्थिति शीघ्र ही समाप्त हो गई। यहीं कारण था कि चंद्रगुप्त का मयूरपोषकों, चरवाहों तथा लुब्धकों के संपर्क में पालन हुआ। परंपरा के अनुसार वह बचपन में अत्यंत तीक्ष्णबुद्धि था, एवं समवयस्क बालकों का सम्राट् बनकर उनपर शासन करता था। ऐसे ही किसी अवसर पर चाणक्य की दृष्टि उसपर पड़ी, फलत: चंद्रगुप्त तक्षशिला गए जहाँ उन्हें राजोचित शिक्षा दी गई। ग्रीक इतिहासकार जस्टिन के अनुसार सांद्रोकात्तस (चंद्रगुप्त) साधारणजन्मा था।

☞"सिकंदर के आक्रमण के समय लगभग समस्त उत्तर भारत धनानंद द्वारा शासित था। नंद सम्राट् अपनी निम्न उत्पत्ति एवं निरंकुशता के कारण जनता में अप्रिय थे। चाणक्य तथा चंद्रगुप्त ने राज्य में व्याप्त असंतोष का सहारा ले नंद वंश को उच्छिन्न करने का निश्चय किया अपनी उद्देश्यसिद्धि के निमित्त चाणक्य और चंद्रगुप्त ने एक विशाल विजयवाहिनी का प्रबंध किया ब्राह्मण ग्रंथों में नंदोन्मूलन का श्रेय चाणक्य को दिया गया है। 

☞"जस्टिन के अनुसार चंद्रगुप्त डाकू था और छोटे-बड़े सफल हमलों के पश्चात्‌ उसने साम्राज्यनिर्माण का निश्चय किया। अर्थशास्त्र में कहा है कि सैनिकों की भरती चोरों, म्लेच्छों, आटविकों तथा शस्त्रोपजीवी श्रेणियों से करनी चाहिए। मुद्राराक्षस से ज्ञात होता है कि चंद्रगुप्त ने हिमालय प्रदेश के राजा पर्वतक से संधि की। चंद्रगुप्त की सेना में शक, यवन, किरात, कंबोज, पारसीक तथा वह्लीक भी रहे होंगे। प्लूटार्क के अनुसार सांद्रोकोत्तस ने संपूर्ण भारत को 6,00,000 सैनिकों की विशाल वाहिनी द्वारा जीतकर अपने अधीन कर लिया। जस्टिन के मत से भारत चंद्रगुप्त के अधिकार में था।

☞"चंद्रगुप्त ने सर्वप्रथम अपनी स्थिति पंजाब में सदृढ़ की। उसका यवनों विरुद्ध स्वातंत्रय युद्ध संभवत: सिकंदर की मृत्यु के कुछ ही समय बाद आरंभ हो गया था। जस्टिन के अनुसार सिकंदर की मृत्यु के उपरांत भारत ने सांद्रोकोत्तस के नेतृत्व में दासता के बंधन को तोड़ फेंका तथा यवन राज्यपालों को मार डाला।

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