Sunday, April 18, 2021

भगवान महावीर को केवलज्ञान की प्राप्ति

भगवान महावीर को केवलज्ञान की प्राप्ति

12 वर्षों तक कठोर तपस्या करने के पश्चात भगवान महावीर को केवल ज्ञान की प्राप्ति हुई, भगवान महावीर ने 12 वर्षों में न जाने कितने ही कष्टों को सहा, कभी वे कारागार में गए, कभी उन्हें फांसी की सजा दी गई,कभी उन्हें संगम देव ने कष्ट दिए,कभी उन्हें आदिवासियों द्वारा प्रताड़ित किया गया, कभी उन्होंने भूख को सहन किया, कभी प्यासे को तो उन्होंने समभाव से ग्रीष्म व शीत ऋतु भी सहन की , एक राजकुमार होते हुए भी उन्होंने हंसकर कष्टों को सहन किया। इन 12 वर्षों की साधना काल के पश्चात वह वर्धमान से महावीर बन गए, वह केवल ज्ञान को पा गए और उसके पश्चात उन्होंने साधु ,साध्वी, श्रावक ,श्राविका नामक चार तीर्थों की स्थापना की और तीर्थंकर कहलाए, महावीर जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर बने ।वैशाख शुक्ल दशमी के दिन ऋजुबालिका नदी के तट पर गौदुहा आसन करते हुए, उन्हें केवलज्ञान की प्राप्ति हुई और वह अरिहंत बन गए।भगवान महावीर के केवल ज्ञान प्राप्त करते हि उनके साधना काल की अवधि पूरी हो गई, वह परम तत्व केवल ज्ञान को पा गए।

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