Monday, April 5, 2021

मिशन कर्मयोगी” नामक राष्ट्रीय सिविल सेवा क्षमता विकास कार्यक्रम (एनपीसीएससीबी)

कैबिनेट ने "मिशन कर्मयोगी" - राष्ट्रीय सिविल सेवा क्षमता विकास कार्यक्रम (एनपीसीएससीबी) को मंजूरी दी
2 सितंबर, 2020 को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने “मिशन कर्मयोगी” नामक राष्ट्रीय सिविल सेवा क्षमता विकास कार्यक्रम (एनपीसीएससीबी) को मंजूरी दी। यह कार्यक्रम सरकारी कर्मचारियों के लिए क्षमता निर्माण का आधार होगा ताकि वे विश्वभर से उत्कृष्ट कार्य पद्धतियां सीखते हुए भारतीय संस्कृति से भी निरंतर जुड़े रहें। मिशन कर्मयोगी का लक्ष्य भविष्य के लिए ऐसे भारतीय लोक सेवक तैयार करना है, जो अधिक रचनात्मक, चिंतनशील, नवाचारी, व्यावसायिक और प्रौद्योगिकी-सक्षम हों। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने निम्नलिखित संस्थागत ढांचे के साथ एनपीसीएससीबी को शुरू करने की मंजूरी दी है-

प्रधानमंत्री की सार्वजनिक मानव संसाधन परिषद।
क्षमता विकास आयोग।
डिजिटल परिसम्पत्तियों के स्वामित्व तथा प्रचालन और ऑनलाइन प्रशिक्षण के लिए प्रौद्योगिकीय प्लेटफार्म हेतु विशेष प्रयोजन कंपनी (एसपीवी)।
मंत्रिमंडल सचिव की अध्यक्षता में समन्वयन एकक।
यह कार्यक्रम सिविल सेवकों की क्षमता निर्माण के लिए नींव रखने के लिए बनाया गया था। यह कार्यक्रम सिविल सेवकों के बीच भारतीय संस्कृति मूल्यों और संवेदनाओं को बढ़ाएगा। कार्यक्रम के लिए एक iGOT कर्मयोगी मंच स्थापित किया जायेगा। iGOT का अर्थ Integrated Government Online Training प्लेटफार्म है। इस कार्यक्रम के मुख्य सिद्धांत इस प्रकार हैं :
ऑन-साइट सीखने पर जोर देना
मानव संसाधन प्रबंधन के लिए “नियम आधारित” से “भूमिकाओं पर आधारित” परिवर्तन का समर्थन करना
साझा प्रशिक्षण बुनियादी ढांचे का एक पारिस्थितिकी तंत्र निर्मित करना
सिविल सेवा पदों को जांचना
सिविल सेवकों को उनके व्यवहार और कार्यात्मक डोमेन दक्षताओं को और मजबूत करने के अवसर उपलब्ध कराना
बेस्ट-इन क्लास कंटेंट क्रिएटर्स के साथ साझेदारी। इसमें स्टार्टअप, विश्वविद्यालय, सार्वजनिक प्रशिक्षण संस्थान और व्यक्तिगत विशेषज्ञ शामिल हैं।
इस योजना में 46 लाख केंद्र सरकार के कर्मचारियों को शामिल किया गया है। इस प्रकार, भारत सरकार ने 510.86 करोड़ रुपये के रूप में आवश्यक धन का अनुमान लगाया है। यह योजना 2020-21 और 2024-25 के बीच लागू की जाएगी। साथ ही, इस योजना की सफलता की निगरानी के लिए एक मूल्यांकन मंच बनाया जायेगा।
इनोवेशन इंडेक्स में भारत चार पायदान की छलांग लगाकर 48वें स्थान पर पहुंचा
ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स (जीआइआइ) यानी वैश्विक नवाचार सूचकांक में भारत पहली बार शीर्ष 50 देशों में शामिल हुआ है। भारत ने चार पायदान की छलांग लगाई और 48वें स्थान पर पहुंच गया है। मध्य और दक्षिण एशियाई देशों में वह इस सूचकांक में शीर्ष पर बना हुआ है। विश्व बौद्धिक संपदा संगठन (डब्ल्यूआइपीओ), कॉर्नेल विश्वद्यिालय और इनसीड बिजनेस स्कूल द्वारा बुधवार को संयुक्त रूप से वैश्विक नवाचार सूचकांक, 2020 की सूची जारी की गई। विश्व बौद्धिक संपदा संगठन ने एक बयान में कहा है कि स्विट्जरलैंड, स्वीडन, अमेरिका, ब्रिटेन और नीदरलैंड सूची में आगे बने हुई हैं। सूची के मुताबिक आइसीटी (सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी), सेवाओं के निर्यात, सरकारी ऑनलाइन सेवाओं और विज्ञान एवं इंजीनियरिंग में स्नातकों जैसे नवाचार के सूचकांक में भारत शीर्ष 15 देशों में शामिल है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि आईआईटी - दिल्‍ली, आईआईटी- बॉम्‍बे, आईआईएस - बेंगलुरु और अन्‍य उच्‍च वैज्ञानिक संस्‍थानों के बल पर भारत निम्‍न, मध्‍य आय अर्थव्‍यवस्‍थाओं में सबसे अधिक नवाचार वाले देश में शामिल हो गया है।

सरकार द्वारा मोबाइल गेमिंग ऐप पबजी समेत उन 118 मोबाइल ऐप पर प्रतिबंध लगाया गया है जो भारत की संप्रभुता एवं अखंडता, भारत की रक्षा, राज्‍य की सुरक्षा और सार्वजनिक व्‍यवस्‍था के लिए नुकसानदेह हैं
सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 69ए के अंतर्गत प्रदान की गई सूचना प्रौद्योगिकी (जनता द्वारा सूचना के उपयोग को अवरुद्ध करने की प्रक्रिया एवं सुरक्षा उपाय) नियम, 2009 के संबंधित प्रावधानों के तहत दी गई शक्तियों का उपयोग करते हुए और खतरों की उभरती प्रकृति को देखते हुए मोबाइल गेमिंग ऐप पबजी समेत 118 ऐप्स को ब्लॉक करने का निर्णय लिया है, क्योंकि उपलब्ध जानकारी के अनुसार ये उन गतिविधियों में शामिल हैं जो भारत की संप्रभुता और अखंडता, भारत की रक्षा, राज्य की सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था के लिए नुकसानदेह हैं। पबजी को दक्षिण कोरियाई वीडियो गेम कंपनी ब्लूहोल ने डेवलप किया है। हालांकि, चीनी मल्टीनेशनल कंपनी टेन्सेंट की इसमें हिस्सेदारी है।

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