Tuesday, April 20, 2021

गंगा प्रसाद विमल Ganga Prasad Vimal

🔲 गंगा प्रसाद विमल 

पहाड़ों_के_चितेरे_कवि गंगा प्रसाद विमल जी का एक सड़क दुर्घटना में देहांत हो गया, हिंदी साहित्य के क्षेत्र में आकस्मिक क्षति हैं।

👤 परिचय
जन्म :- 3 जुलाई,1939, उत्तरकाशी (उत्तराखंड)
मृत्यु :-25 दिसंबर,2019

📚मुख्य_कृतियाँ
◾️कविता_संग्रह : बोधि-वृक्ष, नो सूनर, इतना कुछ, सन्नाटे से मुठभेड़, मैं वहाँ हूँ, अलिखित-अदिखत, कुछ तो है
◾️कहानी_संग्रह : कोई शुरुआत, अतीत में कुछ, इधर-उधर, बाहर न भीतर, खोई हुई थाती
◾️उपन्यास : अपने से अलग, कहीं कुछ और, मरीचिका, मृगांतक
◾️नाटक : आज नहीं कल
◾️आलोचना : प्रेमचंद, समकालीन कहानी का रचना विधान, आधुनिकता : साहित्य का संदर्भ
संपादन : अभिव्यक्ति, गजानन माधव मुक्तिबोध का रचना संसार, अज्ञेय का रचना संसार, लावा (अंग्रेजी), आधुनिक कहानी, सर्वहारा के समूह गान, नागरी लिपि की वैज्ञानिकता, वाक्य विचार (उलत्सिफेरोव)
◾️अनुवाद : इतनो किछू, लिव्ज वेयर एंड अदर पोएम्स
🎗सम्मान
पोयट्री पीपुल पुरस्कार, यावरोव सम्मान, आर्ट यूनिवर्सिटी, रोम का डिप्लोमा सम्मान, अन्तरराष्ट्रीय स्काटिश पोयट्री पुरस्कार, कल्पान्त पुरस्कार, भारतीय भाषा पुरस्कार, कुमार आशन पुरस्कार, संगीत अकादमी सम्मान, डॉ. अम्बेडकर विशिष्ट सेवा सम्मान, साहित्यकार सम्मान, हिंदी उर्दू सम्मान, महाराष्ट्र भारती सम्मान, अन्तरराष्ट्रीय सर्वोच्च बल्गारियाई सम्मान

👉डॉ॰ गंगा प्रसाद विमल हिन्दी साहित्य में अकहानी आंदोलन के जनक के रूप में जाने जाते हैं।

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