Friday, April 23, 2021

हिंदी साहित्य के रीतिकाल के कवियों की श्रेणियां hindi sahitya ke ritikal ke kavi Categories of poets of Hindi literature

इस अवधि के कवियों को तीन श्रेणियों में बाँटा जा सकता है-

 (१) रीतिबद्ध कवि

 (२) रीतिमुक्त कवि

 (३) रीतिसिद्ध कवि


 विद्वानों का यह भी मत है कि इस काल के कवियों ने काव्य में मर्यादा का पूर्ण पालन किया है।  घोर शृंगारी कविता होने पर भी कहीं भी मर्यादा का उल्लंघन देखने को नहीं मिलता है।

रीतिमुक्त कवि वे हैं जिन्होंने न तो लक्षण ग्रंथों की रचना की न ही लक्षण ग्रंथों की रीति से बन्धकर अपनी रचनाओं की नान।  इस प्राकर रीतिकालीन कविता के दौर में भी ये लोग पारंपरिक शैली से हट कर स्वच्छंद रूप से रचना करते रहे।


 रीतिकाल में एक ओर तो रीति का अनुपालन करने वाले कवि थे जो लक्षणों के अनुसार नख-शिख वर्णन में लगे हुए थे वहीं इसके विपरीत रीति मुक्त कवियों ने संस्कृत साहित्य से सुन्दरी के लक्षण न बारे प्रेम और बनाने की अभिव्यक्ति की लौकिक रूप को महत्व दिया।  जो भारतीय पद्धति में एक नई चीज के रूप में देखा जा सकता है। 


 प्रमुख कवि और उनकी रचनाएँँ

 आलम इस धारा के प्रमुख कवि हैं।  इनकी रचना "आलम केलि" है।

 घनानंद

 रीति मुक्त कवियों में सबसे अधिक प्रसिद्द कवि हैं।  इनकी रचनाएँ हैं - कृष्णकंद निबन्ध, सुजन हित प्रबन्ध, इश्कलता, प्रीति पावस, पदावली।

 बहोडा

 विरह बारिश, इश्कर्मा।

ठाकुर

 ठाकुर ठसक, ठाकुर शतक।

 द्विजदेव एक अन्य कवि हैं जो रीति मुक्त कवियों की श्रेणी में गिने जाते हैं।

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