Saturday, April 10, 2021

Muhavare hindi muhavare loktiya one word substitution Part 2

अनेक शब्दों के लिए एक शब्द भाग 02

 
 ( ख )
 खाने से बचा हुआ जूठा भोजन- (उच्छिष्ट)
 खाने योग्य पदार्थ- (खाद्य)
 खाने की इच्छा- (बुभुक्षा)
 खून से रँगा हुआ- (रक्तरंजित)
 खेलना का मैदान- (क्रीड़ास्थल)
 
 ( ग )
 गिरा हुआ- (पतित)
 गृह (घर) बसाकर स्थित (रहनेवाला)- (गृहस्थ)
 ग्राम का रहनेवाला- (ग्रामीण)
 गोद लिया हुआ पुत्र- (दत्तक (पुत्र) )
 गोपों को घेरा बाँधकर नाचने की क्रिया- (रास)
 गुरु के समीप रहनेवाला विद्यार्थी- (अन्तेवासी)
 गुण-दोषों का विवेचन करने वाला- (आलोचक)
 गणित शास्त्र के जानकार- (गणितज्ञ)
 गंगा का पुत्र- (गांगेय)
 गृह (घर) बसा कर रहने वाला- (गृहस्थ)
 
 ( घ )
 घास छीलने वाला- (घसियारा)
 घास खानेवाला- (तृणभोजी)
 घूस लेने वाला/रिश्वत लेने वाला- (घूसखोर/रिश्वतखोर)
 घृणा करने योग्य- (घृणास्पद)
 घर के सबसे ऊपर के खंड की कोठरी- (अटारी)
 घूम-फिरकर सौदा बेचने वाला- (फेरीवाला)
 चार राहों वाला- (चौराहा)
 छिपे वेश में रहना- (छद्मवेश)
 छात्रों के रहने का स्थान- (छात्रावास)
 छः महीने के समय से सम्बन्धित- (छमाही)
 छत में टाँगने का शीशे का कमल या गिलास, जिसमें मोमबत्तियाँ जलती हों- (फानूस)
 छोटे कद का आदमी- (बौना)
 छह कोने वाली आकृति- (षट्कोण)
 छह-छह महीने पर होने वाला- (षाण्मासिक)
 छाती का घाव- (उरक्षत)
 छः मुँहों वाला- (षण्मुख/षडानन)
 ( ज )
 जो कभी न मरे- (अमर)
 जो पढ़ा-लिखा न हो- (अपढ़, अनपढ़)
 जो अक्षर (पढ़ना-लिखना) जानता है- (साक्षर)
 जो दूसरों पर अत्याचार करें- (अत्याचारी)
 जो उच्च कुल में उत्पन्न हुआ हो- (कुलीन)
 जो वन में घूमता हो- (वनचर)
 जो इस लोक से बाहर की बात हो- (अलौकिक)
 जो धन का दुरुपयोग करता है- (अपव्ययी)
 जो कानून के विरुद्ध हो- (अवैध)
 जो कानून के अनुसार हो- (वैध)
 जो पहले न पढ़ा हो- (अपठित)
 जो आँखों के सामने न हो- (अप्रत्यक्ष)
 जो आँखों के सामने हो- (प्रत्यक्ष)
 जो दो भाषाएँ जानता हो- (दुभाषिया)
 जो धर्म का काम करे- (धर्मात्मा)
 जो अभी - अभी पैदा हुआ हो- (नवजात)
 जो उच्च कुल में उत्पन्न हुआ हो- (कुलीन)
 जो नहीं हो सकता- (असंभव)
 जो किसी पक्ष में न हो- (तटस्थ)
 जो कभी न मरे- (अमर)
 जो जन्म से अंधा हो- (जन्मांध)
 जो किये गये उपकारों को नहीं मानता है- (कृतघ्न)
 जो क्षमा के योग्य हो- (क्षम्य)
 जो सब जगह व्याप्त हो-(सर्वव्यापक)
 जो परिचित न हो- (अपरिचित)
 जो सब कुछ जानता है- (सर्वज्ञ)
 जो किसी की ओर से है- (प्रतिनिधि)
 जो बहुत जानता है- (बहुज्ञ)
 जो स्त्री कविता लिखती है- (कवयित्री)
 जो पुरुष कविता रचता है- (कवि)
 जो शत्रु की हत्या करता है- (शत्रुघ्न)
 जो मांस का आहार करता है- (मांसाहारी)
 जो शाक का आहार करता है-(शाकाहारी)
 जो फल का आहार करता है- (फलाहारी)
 जो विज्ञान जनता है- (वैज्ञानिक)
 जो व्याकरण जानता है- (वैयाकरण)
 जो लोक में संभव न हो- (अलौकिक)
 जो स्वार्थ (अपनी ही भलाई) चाहता है- (स्वार्थी)
 जो परमार्थ( दूसरों की भलाई) चाहता है-(परमार्थी)
 जो देखने में प्रिय लगता है- (प्रियदर्शी)
 जो आसानी से लब्ध (प्राप्य) है- (सुलभ)
 जो मन को हर ले- (मनोहर)
 जो सर्वशक्तिसम्पत्र है- (सर्वशक्तिमान्)
 जो कर्त्तव्य से च्युत हो गया है- (कर्त्तव्यच्युत)
 जो (बात) वर्णन के अतीत (बाहर) है- (वर्णनातीत)
 जो स्त्री सूर्य भी न देख सके- (असूर्यम्पाश्या)
 जो अत्यन्त कष्ट से निवारित किया जा सके- (दुर्निवार)
 जो आग्रह सत्य हो- (सत्याग्रह)
 जो मुकदमा दायर करता है- (वादी)
 जो अश्र्व (घोड़े) का आरोही (सवार) है- (अश्र्वारोही)
 जो सरों में जनमता है- (सरसिज)
 जो अच्छे कुल में उत्पत्र हुआ है- (कुलीन)
 जो देने योग्य है- (देय)
 जो देखा नहीं जा सकता- (अदृश्य)
 जो स्त्री के वशीभूत या उसके स्वभाव का है- (स्त्रैण)
 जो बहुत बोलता है- (वाचाल)
 जो स्त्री अभिनय करे- (अभिनेत्री)
 जो पुरुष अभिनय करे- (अभिनेता)
 जो दूसरे से ईर्ष्या करता है- (ईर्ष्यालु)
 जो शत्रु की हत्या करता है- (शत्रुघ)
 जो पिता की हत्या कर चुका- (पितृहन्ता)
 जो माता की हत्या कर चुका- (मातृहन्ता)
 जो अपनी हत्या करता है- (आत्मघाती)
 जो पर के अधीन है- (पराधीन)
 जो देखने में प्रिय लगता है- (प्रियदर्शी)
 जो नभ या ख (आकाश) में चलता है- (नभचर, खेचर)
 जो द्वार का पालन (रक्षा) करता है- (द्वारपाल)
 जो शास्त्र जानता है- (शास्त्रज्ञ)
 जो पोत (जहाज) युद्ध का है- (युद्धपोत)
 जो नष्ट होनेवाला है- (नश्र्वर)
 जो सबको समान भाव से देखे- (समदर्शी)
 जो भेदा या तोड़ा न जा सके- (अभेद्य)
 जो मन को हर ले- (मनोहर)
 जो अनुकरण करने योग्य हो- (अनुकरणीय)
 जो दायर मुकदमे का प्रतिवाद (बचाव या काट) करे- (प्रतिवादी)
 जो राजगद्दी का अधिकारी हो- (युवराज)
 जो धर्माचरण करता है- (धर्मात्मा)
 जो पुस्तकों की आलोचना या समीक्षा करता है- (आलोचक, समीक्षक)
 जो व्याख्या करता है- (व्याख्याता)
 जो साँप पकड़ता और उसका खेल करता है- (सँपेरा)
 जो मोक्ष चाहता हो- (मुमुक्षु)
 जो स्मरण रखने योग्य है- (स्मरणीय)
 जो पांचाल देश की है - (पांचाली)
 जो किसी का पक्ष न ले- (निष्पक्ष)
 जो यान (सवारी) जल में चलता है- (जलयान)
 जो खाया न जा सके- अखाद्य
 जो सबके आगे रहता हो- (अग्रणी)
 जो नेत्रों से दिखाई न दे- (अगोचर)
 जो खाली न जाय- (अचूक)
 जो अपने स्थान या स्थिति से अलग न किया जा सके- (अच्युत)
 जो देखा न जा सके- (अदृश्य)
 जो देखने योग्य न हो-(अदर्शनीय)
 जो पहले न देखा गया हो- (अदृष्टपूर्व)
 जो किसी विशेष समय तक ही लागू हो- (अध्यादेश)
 जो परीक्षा में परीक्षा में उत्तीर्ण न हुआ हो- (अनुत्तीर्ण)
 जो मापा न जा सके- (अपरिमेय)
 जो आँखों के सामने न हो- (अप्रत्यक्ष/परोक्ष)
 जो पूरा या भरा हुआ न हो- (अपूर्ण)
 जो किसी की ओर मुँह किये हुए हो- (अभिमुख)
 जो कभी मृत्यु को प्राप्त न हो- (अमर)
 जो शोक करने योग्य नहीं है- (अशोच्य)
 जो सदा से चलता आ रहा है- (अनवरत)
 जो समय पर न हो- (असामयिक)
 जो दिया न जा सके- (अदेय)
 जो मानव के योग्य न हो- (अमानुषिक)
 जो हिसाब-किताब की जाँच करता हो- (अंकेक्षक)
 जो पहले कभी घटित न हुआ हो- (अघटित)
 जो पहले कभी नहीं सुना गया- (अश्रुतपूर्व)
 जो जन्म लेते ही गिर या मर गया हो- (आदण्डपात)
 जो आलोचना के योग्य हो- (आलोच्य)
 जो इंद्रियों के ज्ञान के बाहर है- (इंद्रियातीत)
 जो छाती के बल चलता हो- (उदग (सर्प)
 जो धरती फोड़ कर जनमता है- (उदभिज)
 जो उद्धार करता है- (उद्धारक)
 जो किसी नियम को न माने- (उच्छृंखल)
 जो भूमि उपजाऊ हो- (उर्वरा)
 जो स्त्री कविता रचती है- (कवियित्री)
 जो कल्पना से परे हो- (कल्पनातीत)
 जो चर्चा का विषय हो- (चर्चित)
 जो यान जल में चलता हो- (जलयान)
 जो तर्क के आधार पर सही सिद्ध हो- (तर्कसंगत)
 जो तीन गुणों (सत्व, रज, व तम) से परे हो- (त्रिगुणातीत)
 जो वस्तु दूसरे के यहाँ रखी हो- (धरोहर)
 जो अपने लाभ या स्वार्थ का ध्यान न रखता हो- (निःस्वार्थ)
 जो कामना रहित हो- (निष्काम)
 जो चिन्ता से रहित हो- (निश्चिंत)
 जो उत्तर न दे सके- (निरुत्तर)
 जो न्याय जनता हो- (नैयायिक)
 जो अति (बहुत) लघु (छोटा) नहीं है- (नातिलघु)
 जो अति (बहुत) दीर्घ (बड़ा) नहीं है- (नातिदीर्घ)
 जो नृत्य करता है- (नृत्यकार/नर्तक)
 जो नीचे लिखा गया है- (निम्नलिखित)
 जो दृष्टि के क्षेत्र से परे हो- (परोक्ष)
 जो परायों का अर्थ (हित) चाहता है- (परमार्थी)
 जो अपने पथ से भटक गया हो- (पथभ्रष्ट)
 जो दूसरों का भला चाहने वाला हो- (परार्थी)
 जो दूसरों का उपकार करने वाला हो)- (परोपकारी)
 जो उक्ति बार-बार कही जाय- (पुनरुक्ति)
 जो प्रणाम करने योग्य हो- (प्रणम्य)
 जो मुकदमे का प्रतिवाद करे- (प्रतिवादी)
 जो पहरा देने वाला हो- (प्रहरी)
 जो पूछने योग्य हो- (प्रष्टव्य)
 जो प्रिय बोलता हो- (प्रियवादी)
 जो दूसरे के अधीन हो- (पराधीन)
 जो प्रशंसा के योग्य हो- (प्रशंसनीय)
 जो अपने मातृभूमि छोड़ विदेश में रहता हो- (प्रवासी)
 जो केवल फल खाकर निर्वाह करता हो- (फलाहारी)
 जो बुद्धि द्वारा जाना जा सके- (बुद्धिजीवी)
 जो भाग्य की धनी हो- (भाग्यवान)
 जो भू धारण करता है- (भूतेश)
 जो पृथ्वी के गर्भ (भीतर) के हाल/शास्त्र जानता हो- (भूगर्भवेत्ता/भूगर्भशास्त्री)
 जो मछली का आहार करता है- (मत्स्याहारी)
 जो हाथों से मुक्त है अर्थात अधिक देने वाला- (मुक्तहस्त)
 जो एक स्थान पर टिक कर नहीं रहता- (यायावर)
 जो युद्ध में स्थिर रहता है- (युधिष्ठिर)
 जो राज्य या राजा से द्रोह करे- (राजद्रोही)
 जो वर्णन के बाहर हो- (वर्णनातीत)
 जो मुकदमा दायर करता है- (वादी /मुदई)
 जो कोई वस्तु वहन करता है- (वाहक)
 जो व्याख्या करता हो- (व्याख्याता)
 जो तेज चलता हो- (शीघ्रगामी)
 जो सुनने योग्य हो- (श्रोतव्य/श्रवणीय)
 जो सुनने में मधुर हो- (श्रुतिमधुर)
 जो सबको एकसमान देखता है- (समदर्शी)
 जो किसी सभा का सदस्य हो- (सभासद)
 जो सबको प्यारा है- (सर्वप्रिय)
 जो सव्य (बायें हाथ से हथियार आदि चलाने में) सध हुआ हो- (सव्यसाची)
 जो नाटक का सूत्र धारण (संचालन) करता है- (सूत्रधार)
 जो दया के साथ (दयालु) है- (सदय)
 जो सरलता से बोध्य (समझने योग्य) हो- (सुबोध)
 जो स्वयं ही सिद्ध (ठीक) हो- (स्वयंसिद्ध)
 जो दूसरे की हत्या करता है- (हत्यारा)

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