Saturday, April 17, 2021

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निपात

मूलत: निपात का प्रयोग अव्‍ययों के लिए होता है। इनका कोई लिंग, वचन नहीं होता। निपातों का प्रयोग निश्चित शब्‍द या पूरे वाक्‍य को श्रव्‍य भावार्थ प्रदान करने के लिए होता है। निपात सहायक शब्‍द होते हुए भी वाक्‍य के अंग नहीं होते। निपात का कार्य शब्‍द समूह को बल प्रदान करना भी है।

निपात के निम्‍नलिखित प्रकार हैं –

(i) स्‍वीकृतिबोधक – हाँ, जी, जी हाँ

(ii) नकारबोधक – जी नहीं, नहीं

(iii) निषेधात्‍मक – मत

(iv) प्रश्‍नबोधक – क्‍या

(v) विस्‍मयादिबोधक – क्‍या, काश

(vi) तुलनाबोधक – सा

(vii) अवधारणाबोधक – ठीक, करीब, लगभग, तकरीबन

(viii) आदरबोधक – जी

(ix) बलप्रदायक – तो ही, भी, तक, भर, सिफ, केवल

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