Monday, April 12, 2021

Pariyavachi sabd, anekarthi sabd Synonyms in hindi vyakaran

Anekarthi shabd


 
 Anekarthi shabd-(अनेकार्थी शब्द)की परिभाषा
 
 ऐसे शब्द, जिनके अनेक अर्थ होते है, अनेकार्थी शब्द कहलाते है।
 दूसरे शब्दों में- जिन शब्दों के एक से अधिक अर्थ होते हैं, उन्हें 'अनेकार्थी शब्द' कहते है।
 अनेकार्थी का अर्थ है – एक से अधिक अर्थ देने वाला।
 
 भाषा में कुछ ऐसे शब्दों का प्रयोग होता है, जो अनेकार्थी होते हैं। खासकर यमक और श्लेष अलंकारों में इसके अधिकाधिक प्रयोग देखे जाते हैं। नीचे लिखे उदाहरणों को देखें-
 
 ''करका मनका डारि दैं मन का मनका फेर।'' (कबीरदास)
 ''रहिमन पानी राखिए, बिन पानी सब सून।
 पानी गए न ऊबरै, मोती, मानुष, चुन।'' (रहीम)
 ''चली चंचला, चंचला के घर से, तभी चंचला चमक पड़ी।''
 
 उपर्युक्त उदाहरणों में प्रयुक्त शब्दों के अर्थ देखें:
 मनका- माला के दाने, मन (चित्त) का
 पानी- चमक (मोती के लिए)
 इज्जत (मानव के लिए)
 जल (चूना, आटे के लिए)
 चंचला- लक्ष्मी, स्त्री, बिजली
 
 यहाँ कुछ प्रमुख अनेकार्थी शब्द दिया जा रहा है।
 
 ( अ, आ )
 
 अपवाद- कलंक, वह प्रचलित प्रसंग, जो नियम के विरुद्ध हो।
 अतिथि- मेहमान, साधु, यात्री, अपरिचित व्यक्ति, यज्ञ में सोमलता लाने वाला, अग़्नि, राम का पोता या कुश का बेटा।
 अरुण- लाल, सूर्य, सूर्य का सारथी, इत्यादि ।
 आपत्ति- विपत्ति,एतराज।
 अंक- भाग्य, गिनती के अंक, नाटक के अंक, चिन्ह संख्या, गोद।
 अनंत- आकाश, ईश्वर, विष्णु, अंतहीन, शेष नाग।
 अर्थ- मतलब, कारण, लिए, भाव, हेतु, अभिप्राय, धन, आशय, प्रयोजन।
 अनन्त- आकाश, अन्तहीन, विष्णु।
 अग्र- पहाड़, वृक्ष, अचल।
 अचल- स्थिर, पर्वत, दृढ़।
 अभिनिवेश- आग्रह, संकल्प, अनुराग, दृढ़ निश्चय।
 अशोक- मगधराज, शोकरहित, एक वृक्ष।
 आँख- नयन, परख, सन्तान, छिद्र।
 अगज- हाथी से भिन्न, पहाड़ से उत्पन्न।
 एकांत- तत्पर, स्वस्थचित्त।
 औसत- बीच का, साधारण, दरमियानी
 
 ( क )
 
 कर- हाथ, टैक्स, किरण, सूँड़ ।
 काल- समय, मृत्यु, यमराज।
 कला- अंश, किसी कार्य को अच्छी तरह करने का कौशल।
 कर्ण- कर्ण (नाम), कान।
 कुशल- खैरियत, चतुर ।
 कल- बीता हुआ दिन, आने वाला दिन, मशीन।
 कर्ण- कर्ण (नाम), कान।
 काम- वासना, कामदेव, कार्य, पेशा, धंधा।
 कनक- सोना, धतूरा, पलाश, गेंहूँ।
 कुंद- भोंथरा, एक मूल।
 कुल- वंश, सब।
 कृष्ण- काला, कन्हैया, वेदव्यास।
 केतु- एक ग्रह, ध्वज, श्रेष्ठ, चमक।
 कोट- परिधान, किला।
 कोटि- श्रेणी, करोड़, गणना।
 कंकण- कंगन, मंगलसूत्र, विवाह-सूत्र।
 कंटक- घड़ियाल, काँटा, दोष।
 कक्ष- कमरा, काँख, लता, रनिवास, बाजू।
 कटाक्ष- आक्षेप, तिरछी निगाह, व्यंग्य।
 केवल- एकमात्र, विशुद्ध ज्ञान।
 कल्प- सबेरा, शराब।
 कक्ष्या- राजा की देहरी, कमरबंद।
 कसरत- व्यायाम, अधिकता।
 कंबु- शंख, कंगन।
 कैतन- ध्वजा, घर, कार्य, आमंत्रण।
 कुरंग- हिरण, नीला, बदरंग।
 कौपीन- लँगोटा, अकार्य, गीद्ध।
 खल- दुष्ट, धतूरा, बेहया, धरती, सूर्य, दवा कूटने का खरल।
 खैर- कत्था, कुशल।
 गण- समूह, मनुष्य, भूतप्रेतादि, शिव के गण, छन्द में गिनती के पद, पिंगल के गण।
 
 घाट- नावादि से उतरने-चढ़ने का स्थान, तरफ।
 
 ( च, छ )
 चंचला- लक्ष्मी, स्त्री, बिजली।
 चय- समूह, नींव, टीला, तिपाई, किले का फाटक।
 छन्द- इच्छा, पद, वृत्त।
 जलज- कमल, मोती, शंख, मछली, जोंक, चन्द्रमा, सेवार।
 जयन्त- इन्द्रपुत्र, शिव, चाँद, एक ताल।
 ज्येष्ठ (जेठ)- पति का बड़ा भाई, बड़ा, हिन्दी महीना।
 
 तीर- बाण, किनारा, तट।
 तारा- आँख की पुतली, नक्षत्र, तारक, प्यारा, बालि की स्त्री, बृहस्पति की स्त्री।
 तार्क्ष्य- घोड़ा, गरुड़, सर्प, स्वर्ण, रथ।
 तात- पूज्य, प्यारा, मित्र, पिता, तप्त।
 
 
 द्रोण- द्रोणाचार्य, डोंगी, कौआ।
 दर्शन- मुलाकात, एक शास्त्र, स्वप्न, तत्त्वज्ञान।
 धन- सम्पति, शुभ कार्य, श्रेय, न्याय, योग।
 धार- प्रवाह, किनारा, सेना।
 नंद- हर्ष, परमेश्वर, मगधराज, मेढ़क।
 नंदा- आनंद, ननद, संपत्ति।
 नाक- नासिका, स्वर्ग, मान।
 नाग- हाथी, पर्वत, बादल, साँप।
 नग- पर्वत, वृक्ष, रत्न विशेष, चाव, अचल, नगीना।
 निशाचर- राक्षस, प्रेत, उल्लू, साँप, चोर।
 
 ( प, फ )
 
 पद- चरण, शब्द, पैर, स्थान, उद्यम, रक्षा, ओहदा, कविता का चरण।
 पक्ष- पन्द्रह दिन का समय, ओर, पंख, बल, घर, सहाय, पार्टी।
 पृष्ठ- पीठ, पत्रा, पीछे का भाग।
 पाश- बंधन, रस्सी, पशु।
 प्रतीक- चिह्न, प्रतिमा, उल्टा।
 बल- सेना, ताकत, बलराम, शक्ति।
 भाग- हिस्सा, विभाजन, भाग्य।
 मान- सम्मान, इज्जत, अभिमान, नाप-तौल, मानना।
 मंडल- जिला, हल्का, बिम्ब, क्षितिज।
 महावीर- हनुमान, बहुत बलवान्, जैन तीर्थकर।
 योग- नियम, उपाय, मिलन, युक्ति, विधा, कौशल, ध्यान, जोड़।
 यति- योगी, जितेन्द्रिय, ब्रह्मा-पुत्र, विराम।
 राशि- समूह, मेष, कर्क, आदि राशियाँ।
 रस- प्रेम, काव्य के नौ रस, अर्क, स्वाद, सार।
 रक्त- लहू, लाल रंग, सिंदूर, केसर।
 रुचि- प्रेम, शोभा, किरण, इच्छा।
 रश्मि- लक्ष्मी, किरण, लगाम।
 रंग- शोभा, सौंदर्य, ठाट-बाट, दशा।
 
 ( ल )
 लक्ष्य- निशाना, उद्देश्य।
 लहर- तरंग, वायु की गति, उमंग, जोश।
 लिंग- चिह्न, प्रमाण, एक पुराण।
 लोक- जगत्, लोग।
 लाल- पुत्र, एक रंग, एक कीमती रत्न।
 लीक- रास्ता, लकीर, प्रथा, गणना।
 लघु- ह्रस्व, छोटा, हल्का।
 लौ- लपट, चाह।
 ( व )
 वर- दूल्हा, वरदान, श्रेष्ट।
 वर्ण- जाति, रंग, अक्षर।
 विग्रह- लड़ाई, शरीर, विच्छेद, देवता की मृर्ति।
 विषम- जो सम न हो, भीषण, बहुत कठिन।
 वेद- ज्ञान, विष्णु, व्याख्या।
 व्योम- आकाश, अभ्रक, कल्याण।
 वशा- स्त्री, बाँझ गाय, बेटी।
 शिव- मंगल, महादेव, वेद, गीदड़, भागयशाली।
 श्यामा- तुलसी, यमुना, रात, राधा।
 शिलीमुख- भ्रमर, बाण, मूर्ख।
 श्री- लक्ष्मी, कमला, चमक, चन्दन।
 शंकु- कील, बाण की नोंक, विष।
 शक्ति- देवी, योग्यता, प्रभाव, बल।
 शंबर- जल, बादल, चित्र, युद्ध, व्रत।
 
 सर- तालाब, सिर, पराजित।
 सेहत- सुख, स्वास्थ्य। रोग से छुटकारा।
 सुधा- अमृत, पानी।
 संज्ञा- नाम, चेतना।
 सारंग- हाथी, कोयल, कामदेव, सिंह, धनुष भौंरा, मृग, मयूर, स्त्री, नानावर्ण, सुन्दर, सरस, बादल, वृक्ष, छाता, वस्त्र, बाल, शंख, शिव, कपूर, चन्दन, आभूषण, स्वर्ण मधुमक्खी, कमल।
 संख्या- अंक, प्रज्ञा, तरीका, नाम।
 संगर- युद्ध, खाई, रजामन्दी, सौदा, वादा।
 संग- पत्थर, साथ, आसक्ति।
 सर्ग- अध्याय, सृष्टि, संतान, प्रकृति।
 सोना- स्वर्ण, नींद।
 ( ह )
 हंस- प्राण, सूर्य, आत्मा, एक पक्षी।
 हरकत- गति, चेष्टा, नटखटपन।
 हरिण- मृग, शिव, नेवला, हंस, विष्णु।
 

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