Friday, April 16, 2021

सर्वनाम (Pronoun) किसे कहते है और उसके भेद उदाहरण सहित Hindi Grammar

सर्वनाम परिभाषाः

कामताप्रसाद गुरू के मतानुसार- सर्वनाम उस विकारी शब्द को कहते हैं जो पूर्वापर संबंध से किसी भी संज्ञा के बदले में आता हैजैसेमैं (बोलनेवाला)तू (सुननेवाला)यह (निकट-वर्ती वस्तु)वह (दूरवर्ती वस्तु) इत्यादि। वाक्य में जिस शब्द का प्रयोग संज्ञा के बदले में होता हैउसे सर्वनाम कहते हैं। सर्वनाम शब्द का अर्थ है- सब का नाम। संज्ञा जहाँ केवल उसी नाम का बोध कराती हैजिसका वह नाम हैवहाँ सर्वनाम से केवल एक के ही नाम का नहींसबके नाम का बोघ होता है। जैसे – राधा कहने से केवल इस नामवाली लड़की का बोध होगा किन्तु सीतागीतारामश्याम सभी अपने लिए मैं का प्रयोग करते हैं तो मैं इन सबका नाम होगा। इसी तरह बोलनेवाले अनेक नामों के बदले तुम या आप और सुननेवाले अनेक नामों के बदले वह या वे का प्रयोग होता है।

संज्ञा के बदले में आने वाले शब्द को सर्वनाम कहते हैं। उदाहरण –

मैंतूतुमआपवहवे आदि।

संज्ञा के स्थान पर प्रयुक्त होने वाले शब्द को सर्वनाम कहते है। संज्ञा की पुनरुक्ति न करने के लिए सर्वनाम का प्रयोग किया जाता है। जैसे – मैंतूतुमआपवहवे आदि।

सर्वनाम सार्थक शब्दों के आठ भेदों में एक भेद है।

व्याकरण में सर्वनाम एक विकारी शब्द है।

हिंदी के मूल सर्वनाम 11 हैंजैसे- मैंतूआपयहवहजोसोकौनक्याकोईकुछ।













प्रयोग की दृष्टि से सर्वनाम के छः प्रकार हैं- 1. पुरूषवाचक – मैंतूआप। 2. निश्चयवाचक – यह,वह। 3. अनिश्चयवाचक – कोई,कुछ। 4. संबंधवाचक – जो,सो। 5. प्रश्रवाचक – कौनक्या। 6. निजवाचक – आप।

सर्वनाम के भेद सर्वनाम के छह प्रकार के भेद हैं-

1. पुरुषवाचक (व्यक्तिवाचक्) सर्वनाम।

2. निश्चयवाचक सर्वनाम।

3. अनिश्चयवाचक सर्वनाम।

4. संबंधवाचक सर्वनाम।

5. प्रश्नवाचक सर्वनाम।

6. निजवाचक सर्वनाम।

पुरुषवाचक (व्यक्तिवाचक्) सर्वनाम

जिस सर्वनाम का प्रयोग वक्ता या लेखक द्वारा स्वयं अपने लिए अथवा किसी अन्य के लिए किया जाता हैवह पुरुषवाचक (व्यक्तिवाचक्) सर्वनाम‘ कहलाता है। पुरुषवाचक (व्यक्तिवाचक) सर्वनाम तीन प्रकार के होते हैं-

1. उत्तम पुरुषवाचक सर्वनाम- जिस सर्वनाम का प्रयोग बोलने वाला स्वयं के लिए करता हैउसे उत्तम पुरुषवाचक सर्वनाम कहा जाता हैं। जैसे – मैंहममुझेहमारा आदि।

2. मध्यम पुरुषवाचक सर्वनाम- जिस सर्वनाम का प्रयोग बोलने वाला श्रोता के लिए करेउसे मध्यम पुरुषवाचक सर्वनाम कहते हैं। जैसे – तूतुमतुझेतुम्हारा आदि।

3. अन्य पुरुषवाचक सर्वनाम- जिस सर्वनाम का प्रयोग बोलने वाला श्रोता के अतिरिक्त किसी अन्य पुरुष के लिए करेउसे अन्य पुरुषवाचक सर्वनाम कहते हैं। जैसे- वहवेउसनेयहयेइसनेआदि।

पुरूषवाचक सर्वनाम- जो सर्वनाम वक्ता (बोलनेवाले)श्रोता (सुननेवाले) तथा किसी अन्य के लिए प्रयुक्त होता हैउसे पुरूषवाचक सर्वनाम कहते हैं। जैसे- मैंतूवह आदि। पुरूषवाचक सर्वनाम के तीन भेद हैं- अ. उत्तम पुरूष- वक्ता या लेखक अपने लिए उत्तम पुरूष का प्रयोग करते हैं। जैसे- मैं लिखता हूँ। हम लिखते हैं। इन वाक्यों में मैं और हम शब्द उत्तम पुरूष सर्वनाम हैं। आ. मध्यम पुरूष- श्रोता के लिए मध्यम पुरूष का प्रयोग होता है। जैसे- तुम जाओ। आप जाइये। इन वाक्यों में तुम और आप शब्द मध्यम पुरूष हैं। इ. अन्य पुरूष- वक्ता या लेखक द्वारा श्रोता के अतिरिक्त किसी अन्य (तीसरे) के लिए अन्य पुरूष का प्रयोग होता है। जैसे- वह पढ़ता है। वे पढ़ते हैं। इन वाक्यों में वह और वे शब्द अन्य पुरूष हैं।

निश्चयवाचक सर्वनाम

जो (शब्द) सर्वनाम किसी व्यक्तिवस्तु आदि की ओर निश्चयपूर्वक संकेत करें वे निश्चयवाचक सर्वनाम कहलाते हैं। जैसे- यह’, ‘वह’, ‘वे’ सर्वनाम शब्द किसी विशेष व्यक्ति का निश्चयपूर्वक बोध करा रहे हैंअतः ये निश्चयवाचक सर्वनाम हैं।

उदाहरण

यह पुस्तक सोनी की है।

ये पुस्तकें रानी की हैं।

वह सड़क पर कौन आ रहा है।

वे सड़क पर कौन आ रहे हैं।

निश्चयवाचक (संकेतवाचक) सर्वनाम- जो सर्वनाम निकट या दूर की किसी वस्तु की ओर संकेत करेउसे निश्चयवाचक सर्वनाम कहते हैं। जैसे- यह लड़की है। वह पुस्तक है। ये हिरन हैं। वे बाहर गए हैं। इन वाक्यों में यहवहये और वे शब्द निश्चयवाचक सर्वनाम हैं।













अनिश्चयवाचक सर्वनाम

जिन सर्वनाम शब्दों के द्वारा किसी निश्चित व्यक्ति अथवा वस्तु का बोध न हो वे अनिश्चयवाचक सर्वनाम कहलाते हैं। जैसे- कोई’ और कुछ’ आदि सर्वनाम शब्द। इनसे किसी विशेष व्यक्ति अथवा वस्तु का निश्चय नहीं हो रहा है। अतः ऐसे शब्द अनिश्चयवाचक सर्वनाम कहलाते हैं।

उदाहरण

द्वार पर कोई खड़ा है।

कुछ पत्र देख लिए गए हैं और कुछ देखने हैं।

अनिश्चयवाचक सर्वनाम- जिस सर्वनाम से किसी निश्चित व्यक्ति या पदार्थ का बोध नहीं होताउसे अनिश्चयवाचक सर्वनाम कहते हैं। जैसे- बाहर कोई है। मुझे कुछ नहीं मिला। इन वाक्यों में कोई और कुछ शब्द अनिश्चयवाचक सर्वनाम हैं। कोई शब्द का प्रयोग किसी अनिश्चित व्यक्ति के लिए और कुछ शब्द का प्रयोग किसी अनिश्चित पदार्थ के लिए प्रयुक्त होता है।

 

संबंधवाचक सर्वनाम

परस्पर सबंध बतलाने के लिए जिन सर्वनामों का प्रयोग होता है उन्हें संबंधवाचक सर्वनाम कहते हैं। जैसे- जो’, ‘वह’, ‘जिसकी’, ‘उसकी’, ‘जैसा’, ‘वैसा’ आदि।

उदाहरण

जो सोयेगासो खोयेगाजो जागेगासो पावेगा।

जैसी करनीतैसी पार उतरनी।

संबंधवाचक सर्वनाम- जो सर्वनाम किसी दूसरी संज्ञा या सर्वनाम से संबंध दिखाने के लिए प्रयुक्त होउसे संबंधवाचक सर्वनाम कहते हैं। जैसे- जो करेगा सो भरेगा। इस वाक्य में जो शब्द संबंधवाचक सर्वनाम है और सो शब्द नित्य संबंधी सर्वनाम है। अधिकतर सो लिए वह सर्वनाम का प्रयोग होता है।

प्रश्नवाचक सर्वनाम

जो सर्वनाम संज्ञा शब्दों के स्थान पर भी आते है और वाक्य को प्रश्नवाचक भी बनाते हैंवे प्रश्नवाचक सर्वनाम कहलाते हैं। जैसे- क्याकौन आदि।

उदाहरण

तुम्हारे घर कौन आया है?

दिल्ली से क्या मँगाना है?

प्रश्रवाचक सर्वनाम- जिस सर्वनाम से किसी प्रश्र का बोध होता है उसे प्रश्रवाचक सर्वनाम कहते हैं। जैसे- तुम कौन हो ? तुम्हें क्या चाहिए ? इन वाक्यों में कौन और क्या शब्द प्रश्रवाचक सर्वनाम हैं। कौन शब्द का प्रयोग प्राणियों के लिए और क्या का प्रयोग जड़ पदार्थों के लिए होता है।

 

निजवाचक सर्वनाम

जहाँ स्वयं के लिए आप’, ‘अपना’ अथवा अपने’, ‘आप’ शब्द का प्रयोग हो वहाँ निजवाचक सर्वनाम होता है। इनमें अपना’ और आप’ शब्द उत्तमपुरुष मध्यम पुरुष और अन्य पुरुष के (स्वयं का) अपने आप का ज्ञान करा रहे शब्द हें जिन्हें निजवाचक सर्वनाम कहते हैं।

विशेष

जहाँ आप’ शब्द का प्रयोग श्रोता के लिए हो वहाँ यह आदर-सूचक मध्यम पुरुष होता है और जहाँ आप’ शब्द का प्रयोग अपने लिए हो वहाँ निजवाचक होता है।

उदाहरण

राम अपने दादा को समझाता है।

श्यामा आप ही दिल्ली चली गई।

राधा अपनी सहेली के घर गई है।

सीता ने अपना मकान बेच दिया है।

निजवाचक सर्वनाम- जो सर्वनाम तीनों पुरूषों (उत्तममध्यम और अन्य) में निजत्व का बोध कराता हैउसे निजवाचक सर्वनाम कहते हैं। जैसे- मैं खुद लिख लूँगा। तुम अपने आप चले जाना। वह स्वयं गाडी चला सकती है। उपर्युक्त वाक्यों में खुदअपने आप और स्वयं शब्द निजवाचक सर्वनाम हैं।

 

सर्वनाम शब्दों के विशेष प्रयोग

आपवेयेहमतुम शब्द बहुवचन के रूप में हैंकिन्तु आदर प्रकट करने के लिए इनका प्रयोग एक व्यक्ति के लिए भी किया जाता है।

* ‘आप’ शब्द स्वयं के अर्थ में भी प्रयुक्त हो जाता है। जैसे- मैं यह कार्य आप ही कर लूँगा।










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