Friday, April 16, 2021

प्रत्यय suffix प्रत्यय के भेद प्रत्यय के उदाहरण हिन्दी व्याकरण Hindi Grammar

  प्रत्यय suffix प्रत्यय के भेद प्रत्यय के उदाहरण हिन्दी व्याकरण Hindi Grammar:
प्रत्यय

प्रत्यय (suffix) उन शब्दों को कहते हैं जो किसी अन्य शब्द के अन्त में लगाये जाते हैं। इनके लगाने से शब्द के अर्थ में भिन्नता या वैशिष्ट्य आ जाता है।
धन + वान = धनवान
विद्या + वान = विद्वान
उदार + ता = उदारता
पण्डित + ई = पण्डिताई
चालाक + ई = चालाकी
सफल + ता = सफलता

प्रत्यय के भेद :

प्रत्यय दो प्रकार के होते हैं:

1. कृत प्रत्यय
2. तद्धित प्रत्यय

1. कृत प्रत्यय :

ऐसे प्रत्यय जो क्रिया धातु रूप के बाद लगते हैं एवं लगने से दुसरे शब्दों की रचना हो जाती है।
इन प्रत्ययों के योग से जो शब्द बनते हैं वे कृदंत प्रत्यय कहलाते हैं।

कृत प्रत्यय के उदाहरण:

तैर + आक :तैराक
ऊपर उदाहरण में आओ देख सकते हैं कि तैर मुख्या शब्द है। आक एक प्रत्यय है। जब मुख्या शब्द एवं प्रत्यय को एक साथ मिलाया जाता है तब यह शब्द तैरक बन जाता है। इससे यह शब्द परिवर्तित हो रहा है।

भाग + ओड़ा : भगोड़ा

जैसा कि आप ऊपर दिए गए उदाहरण में देख सकते हैं यहाँ भाग मुख्या शब्द था। ओडा एक प्रत्यय है जो शब्दों के बाद लगाया जाता है। जब हमने भाग बद के साथ ओड़ा प्रत्यय को लगाया तो फिर शब्द बदलकर भगोड़ा हो गया जिसका मतलब मुख्या शब्द से भिन्न होता है। यह शब्द एवं अर्थ दोनों को परिवर्तित कर देता है।

कृत प्रत्यय के भेद :

कृत प्रत्यय के पांच भेद होते हैं:

◆कर्त्तुवाचक कृदंत
◆कर्मवाचक कृदंत
◆करणवाचक कृदंत
◆भाववाचक कृदंत
◆क्रियावाचक कृदंत

1. कर्तृवाचक कृदंत प्रत्यय

ऐसा शब्द जो प्रत्यय से बना हुआ हो एवं उससे कर्ता का पता चले, ऐसे प्रत्यय कर्तृवाचक कृदंत कहलाते हैं। जैसे: 

कर्त्तुवाचक कृदंत प्रत्यय के उदाहरण:

अक = लेखक , नायक , गायक , पाठक
ऊपर दिए गए उदाहरणों में जैसा कि आप देख सकते हैं की यहाँ पहले शब्द था लेख लेकिन जब इस शब्द में अक प्रत्यय मिलाया गया तो यह बन गया लेखक। इस शब्द से हमें कर्ता का पता चल रहा है। अतः यह कर्त्तुवाचक कृदंत के अंतर्गात्त आयेगा।

अक्कड = भुलक्कड , घुमक्कड़ , पियक्कड़
आक = तैराक , लडाक
आलू = झगड़ालू
आकू = लड़ाकू , कृपालु , दयालु
आड़ी = खिलाडी , अगाड़ी , अनाड़ी
जैसा कि आप ऊपर दिए गए उदाहरण में देख सकते हैं कि यहाँ पहले शब्द भिन्न होते हैं। जैसे ही इनमें ये प्रत्यय लगाए जाते हिं तो फिर इनके शब्द में एवं अर्थ में दोनों में परिवर्तन आ जाता है। अतः ये उदाहरण कर्त्तुवाचक कृदंत के अंतर्गत आयेंगे।

इअल = अडियल , मरियल , सडियल
एरा = लुटेरा , बसेरा
ऐया = गवैया , नचैया
ओडा = भगोड़ा
वाला = पढनेवाला , लिखनेवाला , रखवाला
हार = होनहार , राखनहार , पालनहार
ता = दाता , गाता , कर्ता , नेता , भ्राता , पिता , ज्ञाता
ऊपर दिए गए उदाहरणों में जैसा कि आपने देखा पहले प्रत्यय नहीं लगाए जाते तब तो इन शब्दों का अर्थ भिन्न होता है। जैसे पढ़ना शब्द हमें एक क्रिया के बारे में बता रहा है। हमें इससे एक क्रिया का बोध हो रहा है। लेकिन जब इस क्रिया शब्द में वाला प्रत्यय लगाया जाता है तो इसका अर्थ बिलकुल भिन्न हो जाता है। अब यह शब्द हमें पढ़ाई करने वाले के बारे में बता रहा है। इस शब्द से हमें करता के बारे में पता चल रहा है। अतः यह उदाहरण कर्त्तुवाचक कृदंत के अंतर्गत आएगा।

2. कर्मवाचक कृदंत प्रत्यय:

जिन शब्दों में प्रत्यय लगने के बाद वह शब्द कर्म का बोध कराये, वह प्रत्यय कर्मवाचक कृदंत कहलाता है। जैसे:

कर्मवाचक कृदंत प्रत्यय के उदाहरण:

औना = बिछौना , खिलौना
ऊपर दिए गए उदाहरण में जैसा कि आप देख सकते हैं, यहाँ पहले जो मुख्या शब्द थे वे किसी क्रिया का बोध करा रहे थे जैसे खेलना बिछाना आदि। जब उन शब्दों में प्रत्यय लगाए गए जैसे औना प्रत्यय लगाए गए तो इन प्रत्यय कि वजह से वे शब्द परिवर्तित हो गए।  प्रत्यय कि वजह से उन शब्द का अर्थ भी भिन्न हो गया। अब ये शब्द कर्म का बोध करा रहे है क्रिया का नहीं। अतः यह उदाहरण कर्मवाचक कृदंत के अंतर्गत आएगा।

ना = सूँघना , पढना , खाना
नी = सुँघनी , छलनी
गा = गाना ।
ऊपर दिए गए उदाहरणों में जैसा कि आप देख सकते हैं कि यहाँ पहले जो शब्द थे वे हमें किसी ना किसी क्रिया का बोध करा रहे थे जैसे सूंघ आदि। इनसे हमें क्रिया का पता चल रहा था। लेकिन जैसे ही हमने उन शब्दों में प्रत्यय लगाए वैसे ही उनका अर्थ बदल गया। अब ये शब्द क्रिया का बोध कराने की बजाये ये अब हमें कर्म का बोध करा रहे हैं। अतः ये उदाहरण कर्मवाचक कृदंत के अंतर्गत आयेंगे।

3. करणवाचक कृदंत प्रत्यय:

जब प्रत्यय शब्द के साथ लग जाते हैं एवं उन शब्दों से क्रिया के साधन अर्थात करण का बोध होता है तो ये प्रत्यय करणवाचक कृदंत प्रत्यय कहलाते हैं। जैसे:

करणवाचक कृदंत प्रत्यय के उदाहरण:

आ = भटका , भूला , झूला
ऊपर दिए गए उदारण में जैसा कि आप देख सकते हैं यहाँ पहले जो मुख्या शब्द थे वे हमें क्रिया का बोध करा रहे थे। जैसे: भटक, भूल, झूल आदि। लेकिन जैसे ही इन शब्दों में प्रत्यय मिलाये गए जैसे आ तो इन शब्दों का अर्थ भिन्न हो गया।  जैसे अब भटक का भटका हो गया जो हमें किसी साधान अर्थात करण का बोध करा रहा है। प्रत्यय लगते शब्द परिवर्तित हो गए। अतः ये उदाहरण करणवाचक कृदंत प्रत्यय के अंतर्गत आयेंगे।

करणवाचक कृदंत प्रत्यय के कुछ अन्य उदाहरण:

ऊ = झाड़ू
ई = रेती , फांसी , भारी , धुलाई
न = बेलन , झाडन , बंधन
नी = धौंकनी , करतनी , सुमिरनी , छलनी , फूंकनी , चलनी
जैसा कि आपने ऊपर दिए गए उदाहरणों में देखा यहाँ पहले शब्द हमें क्रिया का बोध करा रहे थे लेकिन जब इनमे प्रत्यय लगाया गया तो फिर ये परिवर्तित हो गए एवं अब ये करण का बोध करा रहे हैं। अतः ये उदाहरण करणवाचक कृदंत प्रत्यय के अंतर्गत आयेंगे।

4. भाववाचक कृदंत प्रत्यय :

ऐसे प्रत्यय जो शब्दों में जुड़ने के बाद उन शब्दों को भाववाचक संज्ञा में बदल देते हैं वे भाववाचक कृदंत प्रत्यय कहलाते हैं। जैसे:

भाववाचक कृदंत प्रत्यय के उदाहरण :

अन = लेखन , पठन , गमन , मनन , मिलन
ति = गति , रति , मति
अ = जय , लेख , विचार , मार , लूट , तोल
आवा = भुलावा , छलावा , दिखावा , बुलावा , चढावा
आई = कमाई , चढाई , लड़ाई , सिलाई , कटाई , लिखाई
आहट = घबराहट , चिल्लाहट
जैसा कि आप ऊपर दिए गए उदाहरणों में देख सकते है कि पहले जो मुख्या शब्द थे उनसे हमें किसी क्रिया का बोध हो रहा था। जैसे कमान, लड़ना, सिलना आदि। ये शब्द हमें क्रिया का बोध करा रहे थे। फिर हमने इनमे प्रत्यय को जोड़ा। जैसे ही इनमें प्रत्यय को जोड़ा गया तो फिर ये शब्द परिवर्तित हो गए। अब ये भाववाचक संज्ञा बन गए हैं। जैसे लेख का लेखन, घबराना का घबराहट आदि। ये भाववाचक संज्ञा का बोध करा रहे हैं। अतः ये उदाहरण भाववाचक कृदंत प्रत्यय के अंतर्गत आयेंगे।

औती = मनौती , फिरौती , चुनौती , कटौती
अंत = भिडंत , गढंत
आवट = सजावट , बनावट , रुकावट , मिलावट
ना = लिखना , पढना
आन = उड़ान , मिलान , उठान , चढ़ान
आव = चढ़ाव , घुमाव , कटाव
आवट = सजावट , लिखावट , मिलावट
इन शब्दों में जैसा कि आप देख सकते हैं की यहाँ पहले हमें क्रिया का बोध हो रहा था। लेकिन जब इन शब्दों में प्रत्यय जोड़े गए तो इनका शब्द एवं अर्थ भिन्न हो गए। अब ये शब्द हमें भाववाचक संज्ञा का बोध करा रहे हैं।

5. क्रियावाचक कृदंत प्रत्यय :

ऐसे प्रत्यय से बने हुए शब्द जिनसे क्रिया के होने का पता चले तो वह क्रियावाचक कृदंत प्रत्यय कहलाते हैं। जैसे:

क्रियावाचक कृदंत प्रत्यय के उदाहरण:

ता = डूबता , बहता , चलता
या = खोया , बोया
आ = सुखा , भूला , बैठा
ना = दौड़ना , सोना
कर = जाकर , देखकर
जैसा कि आप ऊपर दिए गए उदाहरण में देख सकते हैं, पहले शब्द हमें क्रिया का बोध नहीं करा रहे थे। मुख्या शब्द हमें पहले क्रिया के बारे में नहीं बता रहे थे। लेकिन जब उन शब्दों में प्रत्यय जोड़े गए तब ये शब्द परिवर्तित हो गए एवं अब ये हमें क्रिया का बोध करा रहे हैं। अतः ये उदाहरण क्रियावाचक कृदंत प्रत्यय के अंतर्गत आयेंगे।

2. तद्धित प्रत्यय

जब संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण के अंत में प्रत्यय लगते हैं तो वे तद्धित प्रत्यय कहलाते हैं।
तद्धित प्रत्ययों से मिलकर जो सहबद बनते हैं वे शब्द तद्धितांत प्रत्यय शब्द कहलाते हैं।
तद्धित प्रत्यय के उदाहरण:

चतुर + आई  : चतुराई 
ऊपर दिए गए उदाहरण में आप देख सकते हैं, पहले मुख शब्द विशेषण शब्द था लेकिन फिर हमने विशेषण में आई प्रत्यय मिलाया गया जिससे वह शब्द परिवर्तित हो गया। अतः यह उदाहरण तद्धित्त प्रत्यय के अंतर्गत आयेगा।

कुछ अन्य उदाहरण :

पछताना, जगना , पंडित , चतुर , ठाकुर + आइ = पछताई ,जगाई ,पण्डिताई ,चतुराई , ठकुराई
पण्डित, ठाकुर + आइन = पण्डिताइन, ठकुराइन आदि ।
पण्डित, ठाकुर, लड़, चतुर, चौड़ा ,अच्छा + आई = पण्डिताई, ठकुराई, लड़ाई, चतुराई, चौड़ाई , अच्छाई आदि ।
सेठ, नौकर + आनी = सेठ, नौकर आदि ।
बहुत, पंच, अपना +आयत = बहुतायत, पंचायत, अपनायत आदि ।
लोहा, सोना, दूध, गाँव + आर \आरा = लोहार, सुनार, दूधार, गँवार आदि ।
डाका, लाठी + ऐत = डकैत, लठैत आदि ।
अंध, साँप, बहुत, मामा, काँसा, लुट, सेवा + एरा = अँधेरा, सँपेरा, बहुतेरा, ममेरा, कसेरा, लुटेरा , सवेरा आदि।
खाट, पाट, साँप + ओला = खटोला, पटोला, सँपोला आदि ।
बाप, ठाकुर, मान + औती = बपौती, ठकरौती, मनौती आदि ।
बिल्ला, काजर + औटा = बिलौटा, कजरौटा आदि ।
धम, चम, बैठ, बाल, दर्श, ढोल , लल + क = धमक, चमक, बैठक, बालक, दर्शक, ढोलक , ललक आदि।

तद्धित प्रत्यय के भेद :

1. कर्तृवाचक तद्धित प्रत्यय
2. भाववाचक तद्धित प्रत्यय
3. संबंध वाचक तद्धित प्रत्यय
4. गणनावाचक तद्धित प्रत्यय
5. गुणवाचक तद्धित प्रत्यय
6. स्थानवाचक तद्धित प्रत्यय
7. सादृश्यवाचक तद्धित प्रत्यय
8. ऊनवाचक तद्धति प्रत्यय

1. कर्तृवाचक तद्धित प्रत्यय

ऐसे प्रत्यय जो शब्द में उड़ने के बाद शब्द को इस तरह परिवर्तित कर दे कि शब्द से कार्य करने वाले का बोध हो, तब यह कर्तृवाचक तद्धित प्रत्यय कहलाता है। जैसे:

कर्तृवाचक तद्धित प्रत्यय के उदाहरण :

सोना , लोहा , कह , चम + आर = सुनार , लुहार , कहार , चमार आदि ।
मजाक , रस , दुःख , आढत , मुख , रसोई + इया = मजाकिया , रसिया , दुखिया , आढतिया , मुखिया , रसोईया आदि
 समझ , ईमान , दुकान , कर्ज + दार = समझदार , ईमानदार , दुकानदार , कर्जदार आदि ।
मशाल , खजान , मो + ची = मशालची , खजानची , मोची आदि ।
ऊपर सभी उदाहरणों में जैसा कि आपने देखा पहले मुख्या शब्द का अर्थ अलग था।  लेकिन जब मुख्या शब्द में हमने प्रत्यय लगाए तब ही इन शब्दों का अर्थ बिलकुल भीं हो गया। पहले ये सभी शब्द संज्ञा या सर्वनाम या विशेषण थे  प्रत्यय जोड़ गए तब ये शब्द हमें कार्य करने वालों का बोध होने लग गया।

2. भाववाचक तद्धित प्रत्यय

ऐसे प्रत्यय जो शब्द में लगने के बाद शब्द को भाववाचक में बदल दें, वे प्रत्यय भाववाचक तद्धित प्रत्यय कहलाते हैं।
इसमें प्रत्यय लगने की वजह से कहीं कहीं पर आदि स्वर की वृद्धि हो जाया करती है ।
भाववाचक तद्धित प्रत्यय के उदाहरण

भला , बुरा , कठिन , चतुर , ऊँचा + आई = भलाई , बुराई , कठिनाई , चतुराई , ऊँचाई आदि ।
बच्चा , लडक , छुट , काला + पन = बचपन , लडकपन , छुटपन , कालापन आदि ।
देवता ,मनुष्य , पशु , महा , गुरु , लघु + त्व = देवत्व , मनुष्यत्व , पशुत्व , महत्व , गुरुत्व , लघुत्व आदि ।
 सुंदर , मूर्ख , मनुष्य , लघु , गुरु , सम , कवि , एक , बन्धु + ता = सुन्दरता , मूर्खता , मनुष्यता , लघुता , गुरुता , समता , कविता , एकता , बन्धुता आदि ।
जैसा कि आपने ऊपर दिए गए उदाहरणों में देखा पहले सभी मुख्या शब्द विशेषण या दूसरी संज्ञाएँ थी। उनका अर्थ कुछ और था। फिर हमने इन शब्दों में आई, ता, पन जैसे प्रत्ययों को जोड़ा। जैसे ही ये प्रत्यय शब्द के साथ जुड़े तभी उन शब्दों में परिवर्तन आ गया। अब ये शब्द भाववाचक संज्ञा आदि बनगए हैं। अब इन शब्दों से हमें भावों का बोध हो रहा है जैसे लड़कपन, बुढापा, सुदरता आदि। अतः ये उदाहरण भाववाचक तद्धित प्रत्यय के अंतर्गत आयेंगे।

3. संबंधवाचक तद्धित प्रत्यय

ऐसे प्रत्यय जिनसे हमें किसी के बीच के संबंध का पता चले, वे संबंधवाचक तद्धित प्रत्यय कहलाते हैं।

संबंधवाचक तद्धित प्रत्यय के उदाहरण :

लखनऊ, पंजाब, गुजरात, बंगाल, सिंधु + ई = लखनवी, पंजाबी , गुजराती , बंगाली , सिंधी आदि ।
शरीर , नीति , धर्म , अर्थ , लोक , वर्ष , एतिहास + इक = शारीरिक , नैतिक , धार्मिक , आर्थिक , लौकिक , वार्षिक , ऐतिहासिक आदि ।

4. गणनावाचक तद्धित प्रत्यय :

ऐसे प्रत्यय जो शब्द में लगने के बाद शब्द को संख्यावाची बना दे, वे प्रत्यय गणनावाचक प्रत्यय कहलाए हैं। जैसे:

गणनावाचक तद्धित प्रत्यय के उदाहरण :

इक , दु , ति + हरा = इकहरा , दुहरा , तिहरा आदि ।
पांच , सात , दस + वाँ = पांचवां , सातवाँ , दसवां आदि ।
जैसा कि आप ऊपर दिए गए उदाहरणों में देख सकते हैं पहले शब्द का अर्थ भिन्न था लेकिन जैसे ही हमने प्रत्यय लगाया वैसे ही अर्थ भी परिवर्तित हो गया।

5. गुणवाचक तद्धित प्रत्यय:

ऐसे प्रत्यय जो शब्द में लगने के बाद शब्द को गुणवाचक बना दे, वे प्रत्यय गुणवाचक तद्धित प्रत्यय कहलाते हैं।

गुणवाचक तद्धित प्रत्यय के उदाहरण :

भूख , प्यास , ठंड , मीठ + आ = भूखा , प्यासा , ठंडा , मीठा आदि ।
शरीर , नगर , इतिहास + इक = शारीरिक , नागरिक , ऐतिहासिक आदि ।
पक्ष , धन , लोभ , क्रोध , गुण , विद्याथ , सुख , ज्ञान , जंगल + ई = पक्षी , धनी , लोभी , क्रोधी , गुणी , विद्यार्थी , सुखी , ज्ञानी , जंगली आदि ।
 शाप , पुष्प , आनन्द , क्रोध + इत = शापित , पुष्पित , आनन्दित , क्रोधित आदि ।
चमक , भडक , रंग , सज + ईला = चमकीला , भडकीला , रंगीला , सजीला आदि ।
वांछन , अनुकरण , भारत , रमण + ईय = वांछनीय , अनुकरणीय , भारतीय , रमणीय आदि ।
बुद्धि , शक्ति , गति , आयुष + मान = बुद्धिमान , शक्तिमान , गतिमान , आयुष्मान आदि ।
जैसा कि हम उप दिए गए उदाहरणों में देख सकते हैं की यहाँ पहले शब्द भिन्न थे वे संज्ञा के अंतर्गत थे। फिर हमने  इत, मान आदि प्रत्ययो को उन शब्दों के साथ जोड़ा। जैसे ही  वे प्रत्यय शब्द के साथ जुड़े वैसे ही वे शब्द भी बदल गए एवं उनके अर्थ भी बदल गए। अतः ये उदाहरण गुणवाचक तद्धित प्रत्यय के अंतर्गत आएंगे।

6. स्थानवाचक तद्धित प्रत्यय:

ऐसे प्रत्यय जिनसे हमें किसी स्थान का बोध हो वे प्रत्यय स्थानवाचक तद्धित प्रत्यय कहलाते हैं। जैसे:

स्थानवाचक तद्धित प्रत्यय के उदाहरण :

डेरे , दिल्ली , बनारस , सुरत , चाय + वाला = डेरेवाला , दिल्लीवाला , बनारसवाला , सुरतवाला , चायवाला आदि ।
पटना , मुम्बई , नागपुर , जयपुर + इया = पटनिया , मुम्बईया , नागपुरिया , जयपुरिया आदि ।
गुजरात , पंजाब , बंगाल , जर्मन + ई = गुजरती , पंजाबी , बंगाली , जर्मनी आदि ।
कलक , तिरहु + तिया = कलकतिया , तिरहुतिया आदि ।
सर्व , यद , तद + त्र = सर्वत्र , यत्र , तत्र आदि ।

7. सादृश्यवाचक तद्धित प्रत्यय

जिन प्रत्ययों को जोड़ने से बने हुए शब्दों से समानता का पता चले उन्हें सादृश्यवाचक तद्धित प्रत्यय कहते हैं ।

सादृश्यवाचक तद्धित प्रत्यय के उदाहरण :

 पीला , नीला , काला + सा = पीला सा , नीला सा , काला सा आदि ।
सुन , रूप + हरा = सुनहरा , रूपहरा आदि ।
जैसा कि आप ऊपर दिए गए उदाहरणों में देख सकते हिं ये जो मुख्या शब्द थे वे हमें पहले किनहीं रगों का बोध करा रहे थे लेकिन जब हमने उन शब्दों में प्रत्यय मिलाये तब उन शब्दों में परिवर्तन आ गया। ये शब्द अब हमें समानता का बोध करा रहे हैं। अतः ये उदाहरण सादृश्यवाचक तद्धित प्रत्यय के अंतर्गत आयेंगे।

8. ऊनवाचक तद्धित प्रत्यय

ऐसे प्रत्यय जिनसे हमें किसी वास्तु व्यक्ति आदि कि लघुता, प्रियता, हीनता आदि का बोध हो वह प्रत्यय ऊनवाचक तद्धित प्रत्यय कहलाते हैं। जैसे:

ऊनवाचक तद्धित प्रत्यय के उदाहरण :

टोप , कोठर , टोकन , ढोलक , मण्डल , टोकरा , पहाड़ , घन + ई =टोपी , कोठरी , टोकनी , ढोलकी , मण्डली , टोकरी , पहाड़ी , घण्टी आदि ।
 पाग , टूक , टांग + डी = पगड़ी , टुकड़ी , टंगड़ी आदि ।
 खाट , साँप + ओला = खटोला , संपोला आदि ।
ढी , लोटा , डिबा , खाट + इया = बुढिया , लुटिया , डिबिया , खटिया आदि ।
जैस कि आप ऊपर दिए गए उदाहरणों में देख सकते हैं, पहले जो मुख्या शब्द थे वे भिन्न थे एवं उनका कुछ और अर्थ निकल रहा था। फिर हमने उन शब्दों में प्रत्यय जोड़े, फिर वे शब्द परिवर्तित हो गए।

उन शब्दों का अर्थ भिन्न हो गया। अब ये शब्द हमें लघुता, प्रियता, हीनता आदि का बोध करा रहे हैं। अतः ये उदाहरण ऊनवाचक तद्धित प्रत्यय के अंतर्गत आयेंगें।

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