Tuesday, May 4, 2021

चार महत्वपूर्ण बौद्ध परिषदें Four important Buddhist councils parisad

🔷चार महत्वपूर्ण बौद्ध परिषदें 🔷

➡️ पहली बौद्ध परिषद - पहली बौद्ध परिषद का गठन वर्ष 400 ई.पू. महाकाश्यप की अध्यक्षता में बुद्ध के परिनिर्वाण (मृत्यु) के बाद राजगृह के पास। राजा अजातशत्रु ने परिषद को प्रायोजित किया। त्रिपिटक की स्थापना की गई थी। गौतम बुद्ध की शिक्षाओं को दो पिटकों में विभाजित किया गया था - विनय पिटक और सुत्त पिटक।

➡️ द्वितीय बौद्ध परिषद - यह 383 ईसा पूर्व में राजा कलसोका के संरक्षण में वैशाली में आयोजित की गई थी। यह अनुशासन की संहिता, विनय पिटक पर विवाद को निपटाने के लिए आयोजित किया गया था। उपसमूह थे स्टैविरावदा, महासंघिका और सर्वस्वातिदा।

➡️ तीसरा बौद्ध परिषद - यह राजा अशोक के संरक्षण में 250 ईसा पूर्व में पाटलिपुत्र में आयोजित किया गया था। इसकी अध्यक्षता एल्डर मोग्गलिपुत्त तिस्सा ने की। अभिधम्म पिटक की स्थापना हुई

➡️ चौथा बौद्ध परिषद - यह राजा कनिष्क के संरक्षण में 72 ईस्वी में कश्मीर के कुंडलवन में आयोजित किया गया था। इसकी अध्यक्षता वसुमित्र ने की थी और अश्वघोष उनके उपसभापति थे। इसने बौद्ध धर्म को महायान और हीनयान संप्रदायों में विभाजित किया।



🔷Four Important Buddhist Councils🔷


➡️First Buddhist Councils - The first Buddhist council was convened in the year 400 B.C. near Rajgriha following the Buddha's Parinirvana (death) under the chairmanship of Mahakassapa. King Ajatashatru sponsored the council. Tripitaka was established. Teachings of Gautam Buddha was divided into two Pitakas - Vinaya Pitaka and Sutta Pitaka.

➡️Second Buddhist Councils - It was held at Vaishali in 383 BC under the patronage of King Kalasoka. It was held to settle dispute on Vinaya Pitaka, the code of discipline. The subgroups were Sthaviravada, Mahasanghikas and Sarvastivada.

➡️Third Buddhist Councils - It was held at Patliputra in 250 BC under the patronage of King Ashoka. It was presided over by the Elder Moggaliputta Tissa. Abhidhamma Pitaka was established

➡️Fourth Buddhist Councils - It was held at Kundalvan, Kashmir in 72 AD under the patronage of King Kanishka. It was presided over by Vasumitra and Ashwaghosha was his deputy. It divided Buddhism into Mahayana and Hinayana sects.

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