Friday, May 14, 2021

भारतीय राजव्यवस्था Indian polity

📖 भारतीय राजव्यवस्था 📖 
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➨ संसद को कानून बनाने का अधिकार है। संसद कानून द्वारा जजों की संख्या को बदल सकती है। प्रारंभ में सुप्रीम कोर्ट में 7 जज थे।यह संख्या 1956 में 10, 1960 में 13, 1977 में 17 और 1985 में 25 हो गयी। वर्तमान में यह संख्या 31 है।

➨ अनुच्छेद (148-151) भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक की शक्तियों और कार्यों से संबंधित हैं।

➨ तीन स्तरीय पंचायती राज प्रणाली (ग्राम पंचायत, पंचायत समिति, जिला पंचायत) केवल उन्हीं राज्यों के लिए है जिनकी आबादी 20 लाख से ऊपर है।

➨ भारतीय संविधान के अनुच्छेद 330 के तहत लोकसभा में अनुसूचित जातियों और जनजातियों के लिए आरक्षण दिया गया है।

➨ केरल हाईकोर्ट केरल और लक्षद्वीप का हाइकोर्ट है। यह कोच्चि में है। इसकी स्थापना 1956 में हुई।

➨ सुप्रीम कोर्ट के जज बनने की एक प्रमुख योग्यता है कि व्यक्ति कम से कम 10 वर्ष तक किसी उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में कार्य कर चुका हो।

➨ 69 वां संविधान संशोधन 1991 में हुआ। जिसके अंतर्गत दिल्ली को विशेष केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा दिया गया। NCT की स्थापना 1 फरवरी 1992 को पूर्ण हुई।

➨ राज्यपाल राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत कार्य करता है अतः राष्ट्रपति राज्यपाल को हटा सकता है।

➨ संविधान की 5 वीं अनुसूची असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम के 4 राज्यों को छोड़कर, किसी भी राज्य में अनुसूचित क्षेत्रों और अनुसूचित जनजातियों के प्रशासन और नियंत्रण से संबंधित है, जिसे भारतीय संविधान की 6 वीं अनुसूची में अलग से लिया गया है।

➨ भारत का संविधान भारत के सुप्रीम कोर्ट को केंद्र और राज्यों के बीच विवादों का निर्णय वास्तविक न्यायाधिकार के तहत लेने का अधिकार देता है।

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